भगवान शिव के प्रिय मास में काफी व्रत-त्योहार मनाए जाते हैं। 11 अगस्त,बुधवार को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं पति के लिए उपवास रखकर शिव-गौरी का पूजन-वंदन कर झूला झूलती है और सुरीले स्वर में सावन के गीत-मल्हार गाती हैं। इस दिन सुंदर चूड़ियां,वस्त्र पहनने, सोलह श्रृंगार करने का विशेष महत्व है। दरअसल जिन बातों को हम रिवाज या परंपरा मानकर निभाते हैं,असल में तो उन बातों में कोई न कोई वैज्ञानिक कारण अवश्य ही छिपा होता है। जैसे कि हमारे भारतीय समाज में सदियों से ही तीज-त्योहार पर स्त्रियों को आभूषण पहनने पर जोर दिया जाता रहा है, ताकि आभूषणों के द्वारा नारी की सुंदरता में तो चार चाँद लगे ही साथ ही इनको पहनने से सेहत भी चुस्त-दुरुस्त रह सके।
Hariyali Teej 2021: हरियाली तीज आज, जानिए तीज-त्योहार पर श्रृंगार करने के पीछे का महत्व
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सेहत संवारे पायल
आयुर्वेद में सिर ठंडा और पैर गरम होने की बात कही गई है अतः सिर पर सोना और पैरों में चांदी पहनना ही उचित बताया गया है इसलिए पायल हमेशा चांदी की ही पहननी चाहिए। सोने की पायल शारीरिक गर्मी का संतुलन खराब करके रोग उत्पन्न कर सकती है। पायल की छनक से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। पैरों में पायल की लगातार रगड़ से हड्डियों को मज़बूती मिलती है एवं यह शरीर के निचले हिस्सों में वसा बढ़ने से भी रोकती है।
नर्वस सिस्टम को ठीक रखे बिछियां
अधिकांश सुहागिन स्त्रियां पैरों की उँगलियों में बिछिया पहनती हैं। यह गहना सिर्फ विवाहित होने की निशानी ही नहीं अपितु इसको पहनने के पीछे वैज्ञानिक कारण भी है। दोनों पैरों में बिछियां पहनने से महिलाओं का हार्मोनल सिस्टम सुचारु रूप से कार्य करता है। एक्यूप्रेशर पद्धति के अनुसार बिछिया पहनने से शरीर के निचले अंगों के तंत्रिका तंत्र और मांसपेशियां मजबूत रहती हैं। चांदी बिजली की अच्छी संवाहक होने के कारण धरती से प्राप्त होने वाली ऊर्जा को अपने अंदर ग्रहण कर पूरे शरीर तक पहुंचाती है जिससे महिलाएं तरोताजा महसूस करती हैं।
चूड़ी की खनखन मिटाए थकान
भारत में सुहागिनों के लिए चूड़ियां पहनना शुभ शगुन माना जाता है। चूड़ी, कलाई की त्वचा से घर्षण करके हाथों में रक्त संचार को बढ़ाती है। बार-बार त्वचा से चूड़ी की रगड़ लगकर ऊर्जा उत्पन्न होती है जो कि महिलाओं को थकान से बचाए रखती है। कलाई में इन्हें पहनने से श्वास रोग, हृदय रोग की संभावना कम हो जाती है। चटकी और बदरंग चूड़ियां पहनना अशुभ माना जाता हैं। चूड़ियों की खनखन से आस-पास सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
मंगलसूत्र पति-पत्नी के रिश्ते को जोड़ने का अटूट बंधन है। नाज़ुक से मंगलसूत्र की पकड़ बहुत मज़बूत होती है। अनेक शोधों से स्पष्ट हुआ है कि मंगलसूत्र पहनने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है। हिन्दू धर्म में मंगलसूत्र को छिपाकर पहनने की सलाह दी गई है। इसके पीछे तर्क यह है कि इस प्रेम की डोर को शरीर से स्पर्श कराना चाहिए ताकि उसका अधिक से अधिक लाभ मिल सके।