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Hanuman Janmotsav 2020: जानें हनुमान चालीसा के अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता दोहा का रहस्य

Wed, 08 Apr 2020 01:23 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन
अनीता जैन Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 08 Apr 2020 01:23 AM IST
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Hanuman Jayanti Date 2020 hanuman janmotsav 2020 date time and importance
हनुमान जयंती 2020

Hanuman Jayanti Date 2020: चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि पर हर वर्ष हनुमान जयंती के पर्व को बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 08 अप्रैल, बुधवार को है। शास्त्रों के अनुसार बजरंगबली भगवान शिव के ग्यारहवें अवतार हैं। हनुमान जी का जन्म धरती पर भगवान श्री राम की सहायता करने के लिए हुआ था। श्री राम के प्रिय भक्त हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधि के दाता के रूप में जाना जाता है। हनुमान चालीसा में अष्ट सिद्धियों से संबंधित एक दोहा है- अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता। इस दोहे में जिन अष्ट सिद्धियों की बात की गई है, वह बहुत ही चमत्कारी शक्तियां हैं। इस चौपाई का अर्थ है कि हनुमानजी की सच्चे मन से उपासना करने पर वे अपने भक्तों को आठ प्रकार की सिद्धियां तथा नौ प्रकार की निधियां प्रदान कर सकते हैं।आइए जानते है पवनपुत्र के पास कौन सी चमत्कारिक अष्ट सिद्धियां हैं और उनका क्या महत्व है।


 

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Hanuman ji - फोटो : social media

अणिमा
अणिमा सिद्धि के बल पर हनुमान जी कभी भी अति सूक्ष्म रूप धारण कर सकते हैं। इस सिद्धि का प्रयोग हनुमान जी ने तब किया था जब वे समुद्र पार कर लंका पहुंचे थे। इस सिद्धि का उपयोग करके ही हनुमान जी ने पूरी लंका का निरीक्षण किया था। अति सूक्ष्म होने के कारण हनुमानजी के विषय में लंका के लोगों को पता तक नहीं चला।

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महिमा
महिमा सिद्धि के बल पर हनुमान जी ने कई बार विशाल रूप धारण किया है। जब हनुमान जी समुद्र पार करके लंका जा रहे थे तब बीच रास्ते में नागों की माता सुरसा ने उनका रास्ता रोक लिया था। उस समय सुरसा को परास्त करने के लिए हनुमान जी स्वंय का रूप सौ योजन तक बड़ा कर लिया था। इसके अलावा माता सीता को श्री राम की वानर सेना पर विश्वास दिलाने के लिए महिमा सिद्धि का प्रयोग करते हुए स्वंय का रूप अत्यंत विशाल कर लिया था।

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गरिमा
इस सिद्धि की मदद से हनुमान जी स्वंय का भार किसी विशाल पर्वत के समान कर सकते हैं। वह इस सिद्धि का उपयोग हनुमान जी ने महाभारत काल में भीम के सामने किया था। जब भीम को अपनी शक्ति पर घमंड हो गया था, उस समय भीम के घमंड को तोड़ने के लिए हनुमान जी ने एक वृद्ध वानर का रूप धारण करके रास्ते में अपनी पूंछ फैलाकर बैठे हुए थे। भीम ने जब हनुमान जी की पूंछ उठाई तो वह उनकी पूंछ को नहीं उठा सके, इस प्रकार भीम का घमंड का टूट गया।

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डेमो

लघिमा
इस सिद्धि से बजरंगबली स्वंय का भार बिल्कुल हल्का कर सकते हैं और पलभर में वे कहीं भी आ जा सकते हैं। जब हनुमान जी अशोक वाटिका में पहुंचे तब वे अणिमा और लघिमा सिद्धि के बल पर सूक्ष्म रूप धारण करके अशोक वाटिका में पेड़ के पत्तों में छिप गए। इन पत्तों में बैठे- बैठे ही उन्होंने माता सीता को अपना परिचय दिया था। जिसके बाद माता सीता ने हनुमान जी को उनके असली रूप में सामने प्रकट होने के लिए कहा था।

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