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Ganga Dussehra 2018: गंगा दशहरा से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और इसका महत्व

Fri, 22 Jun 2018 10:06 AM IST
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Updated Fri, 22 Jun 2018 10:06 AM IST
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Ganga Dussehra 2018: Ganga Dussehra significance and religious things related to this festival
गंगा दशहरा हिन्दूओं का देवी गंगा को समर्पित एक बड़ा पर्व है। इस पर्व को ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इसे गंगावतारण भी कहा जाता है। जिसका अर्थ होता है गंगा का अवतार। आइए जानते हैं क्या है इस दिन का खास महत्व और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं। 
Ganga Dussehra 2018: Ganga Dussehra significance and religious things related to this festival
गंगा दशहरा का महत्व
हिन्दू पुराणों के अनुसार भागीरथ को अपने पूर्वजों की अस्तियों को विसर्जित करने के लिए एक निर्मल जल की अवश्यकता थी। जिसके लिए उन्होंने गंगा मां की कठोर तपस्या की। लेकिन गंगा का बहाव तेज होने के कारण वह भागीरथ की इच्छा पूरी नहीं कर पा रही थीं। जिसके बाद उन्होंने भागीरथ से कहा कि अगर भगवान शिव उन्हें अपनी जटाओं में भरकर पृथ्वी पर उनका धारा प्रवाह कर दें तो उसकी इच्छा पूरी हो सकती है। 
Ganga Dussehra 2018: Ganga Dussehra significance and religious things related to this festival
मां गंगा के कथन अनुसार भागीरथ ने शिव की कठोर तपस्या की, जिसके फलस्वरूप मां गंगा शिव के कमंडल में समा गई। जिसके बाद ब्रह्म जी ने शिव की जटाओं में से गंगा जी को प्रवाहित कर दिया। जिसके बाद शिव ने गंगा की एक धारा पृथ्वी की ओर प्रवाहित कर दी जिसमें भागीरथ ने अपने पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जिन किया।   
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Ganga Dussehra 2018: Ganga Dussehra significance and religious things related to this festival
हिन्दू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जिस दिन मां गंगा का धरती में आगमन हुआ वह दिन गंगा दशहरा कहलाया। इस दिन भक्त मां गंगा के जल में स्नान करते हैं। ऐसा माना जाता है कि गंगा के जल में स्नान करने से व्यक्ति के सारे पापा नष्ट होकर वो निरोग हो जाता है। इस खास दिन प्रात: काल सुबह उठकर स्नान करने का खास महत्व बताया जाता है। 
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Ganga Dussehra 2018: Ganga Dussehra significance and religious things related to this festival
गंगा स्नान का सबसे अच्छा समय प्रात: काल 4.15 से लेकर सुबह 5.25 बजे तक होता है। इस समय गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। इस स्नान को ऋषि स्नान भी कहा जाता है। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि जो लोग इस समय स्नान नहीं कर पाए हैं उन्हें यहां स्नान करने से पुण्यलाभ नहीं मिलेगा। श्रद्धालु सुबह से लेकर सूर्य अस्त तक भी स्नान करके पुण्य कमा सकते है।
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