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आसान नहीं हैं बोधिवृक्ष की देखभाल, सैंकडों जवान सहित ये भी रहते हैं इसकी सुरक्षा में तैनात

Wed, 10 May 2017 09:16 AM IST
amarujala.com-written by: किरण सिंह
amarujala.com-written by: किरण सिंह Updated Wed, 10 May 2017 09:16 AM IST
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buddha purnima: bodhi tree stand with 12 pillar in mahabodhi temple

बौद्घ धर्म के अनुयायियों के लिए महा बौद्घि मंदिर का काफी महत्व है। गया स्थित इस मंदिर में हर साल  यहां लाखों बौद्घ अनुयायी आते है। मंदिर में मौजूद बोधिवृक्ष से भी अनुयायी खास जुड़े है, क्योंकि ये वहीं वृक्ष है जिसके नीचे गौतम बुद्घ को ज्ञान प्राप्त हुआ था। मंदिर में मौजूद यह वृक्ष अपनी पीढ़ी का चौथा वृक्ष है, जो 2650 साल पुराना है। इसकी टहनियां इतनी विशाल है कि लोहे के 12 पिलरों का सहारा दिया गया है। यह देश का पहला ऐसा वृक्ष है, जिसके दर्शन के लिए हर साल करीब पांच लाख श्रद्धालु आते है, जिसमें से करीब दो लाख विदेशी होते है। जानें कैसी होती है इस वृक्ष की देशभाल

buddha purnima: bodhi tree stand with 12 pillar in mahabodhi temple

इस वृक्ष की सुरक्षा के लिए बिहार मिलिट्री पुलिस की चार बटालियन करीब 360 जवान 24 घंटे लगे रहते हैं और इस पेड़ को छूने पर भी प्रतिबंध है। कीटों से बचाने के लिए इस पर एक विशेष तरह के पदार्थ का छिड़काव किया जाता है। वहीं पोषक तत्व देने के लिए मिनरल्स का लेप चढ़ाया जाता है। इस पेड़ का चेकअप करने देहरादून से भारतीय वन अनुसंधान के वैज्ञानिक आते है। वृक्ष सहित मंदिर की देखभाल और सुरक्षा के लिए चार डोर मेटल डिटेक्टर, 10 हैंड मेटल डिटेक्टर और करीब 50 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं।

buddha purnima: bodhi tree stand with 12 pillar in mahabodhi temple

मंदिर में मौजूद बोधिवृक्ष की यह चौथी पीढ़ी 141 साल पुरानी हैं। 1881 में महाबोधि मंदिर के जीर्णोद्वार के समय एलेक्जेंडर कनिंघम ने श्रीलंका के अनुराधापुरम से बोधिवृक्ष
की शाखा को मंगवाकर इसे उसी जगह पर लगवाया।

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buddha purnima: bodhi tree stand with 12 pillar in mahabodhi temple

मंदिर में मौजूद बोधिवृक्ष की पहली पीढ़ी के वृक्ष जिसके नीचे गौतम बुद्घ को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी, उस वृक्ष की टहनियों को सम्राट अशोक ने अपने पुत्र महेन्द्र और पुत्री संघमित्रा को देकर श्रीलंका में बौद्घ धर्म के प्रचार प्रसार के लिए भेज दिया। कुछ समय बाद सम्राट की रानी तिष्यरक्षिता ने चोरी छुपे उस पेड़ को कटवा दिया, लेकिन उसके कुछ
समय बाद ही उसी जगह दूसरी पीढ़ी का वृक्ष उग गया। जो करीब 800 साल तक रहा।

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buddha purnima: bodhi tree stand with 12 pillar in mahabodhi temple

दूसरी पीढ़ी के वृक्ष को एक नरेश ने नष्ट करवाने की कोशिश की, लेकिन उसकी जड़े पूरी तरह से नष्ट नहीं हो पाई और कुछ ही सालों बाद उन्हीं जडों से तीसरी पीढ़ी का वृक्ष
निकला, जो 1250 वर्षो तक रहा। 1876 में एक प्राकृतिक आपदा के कारण यह वृक्ष्स भी नष्ट हो गया था। तब कनिंघम ने श्रीलंका के अनुराधापुरम में रखी टहनियों को मंगवाकर वृक्ष लगाया।

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