वाहीदुद्दीन खान
Updated Mon, 12 Sep 2016 12:44 PM IST
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बकरीद
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इस साल ईद अल अजहा यानी बकरीद 13 सितंबर को मनायी जाएगी। इसे लेकर बाजार में काफी चहल-पहल नजर आने लगी है। खासतौर पर बकरों का बाजार भाव इन दिनों काफी बढ़ा-चढ़ा है। कारण यह है कि हर कोई इस मौके पर अल्लाह को अपनी ओर से बड़ी कुर्बानी देना चाहता है। लेकिन क्या बकरों की कुर्बानी बकरीद में जरुरी है, और ऐसा है तो क्यों?
इस्लामिक विषयों के जानकार 'वाहीदुद्दीन खान' बताते हैं कि हजरत इब्राहिम से खुदा ने कहा कि तुम अपने बेटे की कुर्बानी दो। खुदा ने जब इब्राहिम का जज्बा देख लिया तो उनके बेटे की जगह एक जानवर को बदल दिया। इसके बाद से बकरीद मनाया जाने लगा। इसलिए बकरीद में अपनी अजीज चीज यानी इच्छाओं को कुर्बान करने का पैगाम खुदा ने दिया है।
दरअसल बकरीद के मौके पर बकरे की कुर्बानी एक प्रतीकात्मक कुर्बानी होती है। लेकिन यह जरुरी नहीं कि हर किसी को इस मौके पर बकरे की कुर्बानी देनी ही होती है।
फुका में कुर्बानी का एक बड़ा नियम यह है कि जिनके पास 613 से 614 ग्राम चांदी हो यानी आज के हिसाब से इतनी चांदी की कीमत के बराबर जिनके पास धन हो उस पर कुर्बानी फर्ज है यानी उसे कुर्बानी देनी चाहिए।
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