Sheetala Saptami 2025: आज शीतला सप्तमी है। शीतला सप्तमी का पर्व होली के सात दिन बाद मनाया जाता है, जिसे बसौड़ा भी कहा जाता है। यह विशेष दिन शीतला माता की पूजा का होता है, जो भक्तों को बीमारियों से सुरक्षा और परिवार में सुख-शांति का आशीर्वाद देती हैं। शीतला माता को ठंडक प्रदान करने वाली देवी माना जाता है, और उनका पूजन खासकर ग्रीष्मकाल के आगमन से पहले किया जाता है, ताकि शरीर में ठंडक बनी रहे और त्वचा संबंधित बीमारियों से बचाव हो सके। इस दिन बासी भोजन का भोग शीतला माता को अर्पित किया जाता है, जो एक दिन पहले तैयार किया जाता है।
Sheetla Saptami: शीतला सप्तमी आज, जानें पूजा मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि
Basoda 2025: शीतला सप्तमी का पर्व इस साल 21 मार्च, शुक्रवार को मनाया जाएगा। सूर्योदय से पहले पूजा का विशेष महत्व है, जिसमें स्नान के बाद माता शीतला की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। इस दिन विशेष ध्यान रखना चाहिए कि पूजा में किसी भी प्रकार की आग का प्रयोग नहीं किया जाए।
शीतला सप्तमी का महत्व
शीतला सप्तमी का पर्व होली के सात दिन बाद मनाया जाता है और इसे बसौड़ा भी कहते हैं। इस दिन माता शीतला की पूजा की जाती है, जो ठंडक और स्वास्थ्य की देवी मानी जाती हैं। यह पूजा विशेष रूप से ग्रीष्म ऋतु के आगमन से पहले की जाती है, ताकि शरीर में ठंडक बनी रहे और त्वचा संबंधित बीमारियों से बचाव हो सके। इस दिन बासी भोजन का भोग माता शीतला को अर्पित किया जाता है, जो एक दिन पहले तैयार किया जाता है। पूजा के जरिए भक्त शीतला माता से समृद्धि, सुख-शांति और स्वस्थ जीवन की प्राप्ति की कामना करते हैं।
शीतल माता की पूजा विधि
- शीतला सप्तमी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
- फिर, शीतला माता की पूजा विधिपूर्वक करें।
- पहले माता को जल अर्पित करें।
- फिर गुलाल, कुमकुम आदि अर्पित करें।
- एक दिन पहले तैयार किया गया बासी भोजन माता को प्रसाद के रूप में अर्पित करें।
- पूजा के बाद घर के प्रवेश द्वार पर स्वास्तिक या अन्य शुभ चिन्ह बनाएं।
ध्यान रखने योग्य बातें
- शीतला माता को हमेशा ठंडे और बासी भोजन का भोग अर्पित करें।
- पूजा के दौरान दीया, धूप, अगरबत्ती या किसी प्रकार की अग्नि का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
- पूजा करते समय शुद्धता का पालन करें और घर के आसपास साफ-सफाई रखें।
- पूजा सूर्योदय से पहले पूरी करनी चाहिए।
- शीतला सप्तमी की पूजा से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है और यह शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक है।
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