Navratri 2021: इस तरह से करेंगे दुर्गा सप्तशती का पाठ तो आदिशक्ति की कृपा से होगा लाभ और मनोकामना पूर्ति
पाठ करने से पहले ध्यान रखें ये बात
यदि आप दुर्गा सप्तशती का पाठ करने जा रहे हैं तो सबसे पहले नवार्ण मंत्र, कवच, कीलक व अर्गला स्तोत्र का पाठ करना चाहिए, तत्पश्चात दुर्गा सप्तशती के पाठ का आरंभ करें। इस तरह से पाठ करने से पूर्ण फल की प्राप्ति होती है और मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं।
तीन प्रकार से होता दुर्गा सप्तशती का पाठ
दुर्गा सप्तशती का पाठ तीन प्रकार से किया जाता है। पहला तेज आवाज में बोलकर, इसके बाद इतने मंद स्वर में कि जिसमें केवल होंठ के भीतर तक आवाज सीमित रहे। तीसरे प्रकार में पाठ मन ही मन में किया जाता है जिसमें होंठ भी नहीं हिलते हैं। इन तीनों में से सबसे पहले वाला तरीका उत्तम माना गया है। सप्तशती का पाठ करते समय ध्यान रखें कि उसमें लिखे मंत्रों का अर्थ भलिभांति समझना आवश्यक होता है, इसलिए पाठ को समझते हुए उसके अर्थ को जानते हुए ही पाठ करें। कभी भी दुर्गा सप्तशती के मंत्रो का मतलब समझे बगैर पाठ नहीं करना चाहिए। इससे आपको पाठ के पूर्ण फल की प्राप्ति नहीं होती है।
शब्दों का उच्चारण होना चाहिए स्पष्ट
पाठ करते समय सबसे आवश्यक होता है कि शब्दों का उच्चारण सही और स्पष्ट होना चाहिए। कुछ लोग गाते हुए पाठ करते हैं तो वहीं कुछ लोग बहुत ही तेजी के साथ पाठ करते हैं लेकिन शास्त्रों के अनुसार पाठ को मध्यम स्वर में आराम से समझते हुए पढ़ना चाहिए। शास्त्रों में शब्दों के दबाकर या फिर बिना उसके अर्थ को जाने पढ़ना निषेध बताया गया है। सही प्रकार से पाठ करने से मां भगवती प्रसन्न होती है और अपनी कृपा बरसाती हैं।
हाथ में न पकड़े पुस्तक
अक्सर हम यदि कोई पाठ करते हैं तो पुस्तक को हाथ में ही पकड़े रहते हैं। यदि आप नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ कर रहे हैं तो इस बात को ध्यान में रखें कि पुस्तक को कभी हाथ में लेकर पाठ नहीं करना चाहिए बल्कि उसे किसी चौकी या फिर पुस्तक स्टैंड पर रखकर ही पढ़ना चाहिए। सही प्रकार से दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से ही पूर्ण फल की प्राप्ति होती है।