हिन्दू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह वर्ष का तीसरा महीना है। यह माह बेहद गर्म होता है। इस दौरान उत्तर भारत लू (गर्म हवाएं) की चपेट में आ जाता है। ज्येष्ठ के महीने में सूर्यदेव अपने रौद्र रूप में रहते हैं जिसके कारण प्रचंड गर्मी रहती है। इसलिए ज्येष्ठ के महीने में पानी पिलाने और दान करने का विशेष महत्व होता है। पूर्णिमांत के अनुसार ज्येष्ठ माह 8 मई से शुरु हो रहा है और जून 6 को समाप्त होगा। उसके बाद आषाढ़ माह प्रारंभ हो जाएगा।
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पवित्र स्नान
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ज्येष्ठ महीने में जल का महत्व
ज्येष्ठ माह में पानी का वाष्पीकरण तेजी से होता है जिसके कारण से नदियां और तालाब सूख जाते हैं। हिन्दू सभ्यता में इस महीने जल के संरक्षण का विशेष जोर दिया जाता है। ज्येष्ठ महीने में गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी जैसे व्रत भी रखे जाते हैं। ये व्रत प्रकृति में जल को बचाने का संदेश देते हैं। गंगा दशहरा में नदियों की पूजा और निर्जला एकादशी में बिना जल का व्रत रखा जाता है।
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ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले व्रत एवं त्योहार
ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले व्रत एवं त्योहार
इस महीने की शुरुआत जहां नारद जयंती से शुरु होती है। वहीं इस माह का अंतिम पर्व गायंत्री जयंती (2 जून 2020) है। इसके अलावा ज्येष्ठ माह में अचला एकादशी, शनि जयंती और वट सावित्री जैसे बड़े धार्मिक व्रत एवं त्योहार पड़ते हैं। जानते हैं इन पर्वों और त्योहारों की तारीखें-
नारद जयंती
नारद जयंती 'देवऋषि नारद मुनि' के जन्म दिवस के रूप में वैशाख कृष्ण प्रतिपदा के दिन मनाई जाती है। इस साल नारद जयंती 8 मई को है।
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अपरा एकादशी 2020
- फोटो : Rohit Jha
अपरा एकादशी
अपरा एकादशी 18 मई को है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अपरा एकादशी अथवा अचला एकादशी के नाम से जाना जाता है। सनातन मान्यता के अनुसार, एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।