हिंदू संस्कृति में मेष संक्रांति का काफी महत्व है। इस दिन से खरमास की समाप्ति तथा मंगल कार्यों की शुरुआत हो जाती है। आज के दिन स्नान-ध्यान करना विशेष लाभकारी होता है।
इस साल मेष संक्रांति 14 अप्रैल के दिन है। इस दिन सूर्य प्रातःकाल 8 बजकर 10 मिनट पर अश्वनी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। मेष संक्रांति के दिन से सूर्य अपनी उच्चस्थ राशि मेष में चले जाते हैं। वृष की संक्रांति में यही सूर्य ‘रवय’ कहलाता है, मिथुन की संक्रांति में ‘सूर्य’ कहलाता है, कर्क की संक्रांति में ‘भानु’, सिंह की संक्रांति में ‘ख्रग’, कन्या में संक्रांति में 'पुष्ण', तुला में 'हिरण्यगर्भ', वृश्चिक में 'मारिच', धनु में 'आदित्य', मकर में 'सावित्रे', कुंभ में 'अर्क'तथा मीन संक्रांति में 'भास्कर' नामक सूर्य रहता है। ये बारह सूर्य, द्वादश सूर्य कहलाते हैं।
करें इन मंत्रों का जाप
मेष संक्रांति के दिन यदि सूर्य के द्वादश रूपों का नाम लिया जाए, तो पूरे वर्ष सूर्य कृपा बनी रहती है। साथ-साथ पूरे वर्ष की सूर्य आराधना एक ही दिन में संपन्न हो जाती है। आज के दिन 'ओम मित्राय नमः, ओम रवये नमः, ओम सूर्याय नमः, ओम भानवे नमः, ओम खगाय नमः, ओम पुष्णे नमः, ओम हिरण्यगर्भाय नमः, ओम मारिचाये नमः, ओम आदित्याय नमः, ओम सावित्रे नमः, ओम अर्काय नमः, ओम भास्कराय नमः' सूर्य के ये द्वादश नाम यदि जपें, तो पूरे वर्ष सूर्य अनुकूल रहता है।
यदि कुंडली में वैध्वय योग हो, विवाह ना हो रहा हो, तो बैशाखी या मेष संक्रांति में तांबा, गुड, लाल कपडा दान करने से लाभ होता है और विवाह योग बनता है। इस दिन नदी में स्नान कर सूर्य को अर्ध्य चढ़ाने से ग्रहदोष भी शांत होते हैं और मनोकामना भी पूर्ण होती है।