Diwali Par Karein Maa Lakshmi aur Ganpati ki Aarti: आज देश भर में धूमधाम से दीपावली का त्योहार मनाया जा रहा है। दीपों की यह पावन रात पूरे भारतवर्ष को रोशनी से सराबोर कर देती है। हिंदू धर्म में दिवाली का विशेष महत्व है, क्योंकि यह दिन मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और धन के देवता कुबेर की आराधना का होता है। मान्यता है कि विधिपूर्वक पूजन करने से जीवन में सुख-समृद्धि, बुद्धि और धन का आगमन होता है। घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और नकारात्मकता दूर होती है।
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दिवाली की पूजा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाती जब तक अंत में आरती न की जाए। आरती से न केवल पूजा का समापन होता है, बल्कि यह भक्त और भगवान के बीच एक आत्मिक संबंध भी स्थापित करती है। इस दिन मां लक्ष्मी और श्री गणेश जी की आरती का विशेष महत्व होता है। यहां हम आपके लिए दिवाली पूजन हेतु लक्ष्मी जी की ‘ॐ जय लक्ष्मी माता’ और गणेश जी की ‘जय गणेश, जय गणेश देवा’ जैसी प्रसिद्ध आरतियां प्रस्तुत कर रहे हैं।
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Diwali 2025 Lakshmi Ganesh Aarti: दिवाली पर करें मां लक्ष्मी और गणपति की आरती, मिलेगा धन और बुद्धि का आशीर्वाद
Diwali 2025 Lakshmi Ganesh Aarti: 20 अक्तूबर 2025 को मनाई जाने वाली दिवाली पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की पूजा का विशेष महत्व है। पूजा के अंत में की जाने वाली आरती से सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है।
भगवान गणेश की आरती
जय गणेश जय गणेश,जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश जय गणेश,जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
पान चढ़े फल चढ़े,और चढ़े मेवा ।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा ॥
जय गणेश जय गणेश,जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥
मां लक्ष्मी की आरती
ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
मैया तुम ही जग-माता।।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
मैया सुख संपत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
तुम पाताल-निवासिनि,तुम ही शुभदाता।
मैया तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी,भवनिधि की त्राता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
मैया सब सद्गुण आता।
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
मैया वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव,सब तुमसे आता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।
मैया क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
महालक्ष्मी जी की आरती,जो कोई नर गाता।
मैया जो कोई नर गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता।
ऊं जय लक्ष्मी माता।।
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