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Dev Diwali 2020: कार्तिक पूर्णिमा पर होगी देवों की दिवाली, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व 

Fri, 27 Nov 2020 10:36 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Fri, 27 Nov 2020 10:36 AM IST
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Dev Diwali 2020 On kartik purnima dev diwali celebrate in Kashi
देव दिवाली 2020: देव दिवाली काशी में हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। - फोटो : सोशल मीडिया

देव दिवाली काशी में हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इस साल देव दिवाली 30 नवंबर को मनाई जाएगी। इस बार खास बात ये है कि कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण का साया भी लगने जा रहा है। देव दिवाली को लेकर धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सभी देवता स्वर्गलोक से काशी में दिवाली मनाने आते हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर दीप दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इस दिन दीप दान करने से सभी देवताओं का आशीर्वाद मिलता हैं। आइए जानते हैं इस पर्व का धार्मिक महत्व है और देव दिवाली का शुभ मुहूर्त क्या है। 

Dev Diwali 2020 On kartik purnima dev diwali celebrate in Kashi
देव दिवाली 2020: देव दिवाली का शुभ मुहूर्त - फोटो : सोशल मीडिया

देव दिवाली का शुभ मुहूर्त
हिन्दू पंचांग के अनुसार, देव दिवाली 30 नवंबर को मनाई जाएगी। जबकि कार्तिक पूर्णिमा तिथि 29 नवंबर को दोपहर 12:47 बजे से शुरू होकर 30 नवंबर को दोपहर 2:59 बजे समाप्त होगी।

Dev Diwali 2020 On kartik purnima dev diwali celebrate in Kashi
कार्तिक पूर्णिमा की तिथि पर भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था। - फोटो : Social media
देव दिवाली का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा तिथि पर भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था, जिससे देवगण बहुत प्रसन्न हुए और भगवान विष्णु ने शिवजी को त्रिपुरारी नाम दिया जो शिव के अनेक नामों में से एक है। त्रिपुरासुर के वध होने की खुशी में सभी देवता स्वर्गलोक से उतरकर काशी में दीपावली मनाते हैं।

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Dev Diwali 2020 On kartik purnima dev diwali celebrate in Kashi
कार्तिक पूर्णिमा का महत्व महाभारत से भी जुड़ा है। - फोटो : सोशल मीडिया
इसलिए इस दिन किया जाता है दीपदान
कार्तिक पूर्णिमा का महत्व महाभारत से भी जुड़ा है। कथा के अनुसार जब कौरवों और पांडवों के बीच महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ तब पांडव इस बात को लेकर बहुत ही परेशान और दुखी हुए कि युद्ध में उनके कई सगे- संबंधियों की मृत्यु हो गई। असमय मृत्यु के कारण वे सोचने लगे कि इनकी आत्मा को शांति कैसे मिलेगी। 
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यमुना तट पर दीपदान करते श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
पितरों की आत्मा की शांति के लिए किया गया दीपदान

तब भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को चिंता को दूर करने के लिए कार्तिक शुक्लपक्ष की अष्टमी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक पितरों की आत्मा की तृप्ति के लिए तर्पण और दीपदान करने को कहा था। तभी से कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान और पितरों को तर्पण देने के लिए इस तिथि का महत्व होता है।

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