Basant Panchami 2023: आज वसंत पंचमी है। पूरे देश में वसंत पंचमी के त्योहार को बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। वसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजन का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर ज्ञान, विद्या, कला, साहित्य और संगीत की देवी मां सरस्वती का जन्म हुआ था। वसंत पंचमी के दिन से ही बसंत ऋतु की शुरुआत हो जाती है। इसके बाद से सर्दियां धीरे-धीरे खत्म होने लगती है। वसंत पंचमी तिथि एक अबूझ मुहूर्त होती है जिसमें किसी भी शुभ कार्य को बिना मुहूर्त के किया जा सकता है। बसंत पंचमी पर विद्यारंभ करने की प्रथा होती है। वसंत पचंमी के दिन मां सरस्वती की विधि-विधान की पूजा और मंत्रों का जाप करना शुभ और फलदायी होता है। आइए जानते हैं वसंत पंचमी पर सरवस्ती पूजा के लिए मुहूर्त, पूजा विधि, शुभ योग समेत महत्वपूर्ण जानकारियां...
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Basant Panchami 2023: वसंत पंचमी आज, जानिए सरस्वती पूजा शुभ मुहूर्त, विधि, मंत्र और महत्व
Thu, 26 Jan 2023 08:13 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 26 Jan 2023 08:13 AM IST
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basant panchami 2023
- फोटो : अमर उजाला
vasant panchami 2023
- फोटो : अमर उजाला
वसंत पंचमी पूजा शुभ मुहूर्त 2023
हिंदू पंचांग के अनुसार माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी का त्योहार माना जाता है। इस बार पंचमी तिथि की शुरुआत 25 जनवरी को दोपहर 12 बजकर 34 मिनट से हो रही है। ये तिथि 26 जनवरी को सुबह सुबह 10 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार वसंत पंचमी 26 जनवरी को ही मनाई जाएगी। इस दिन सुबह 07 बजकर 12 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त है।
हिंदू पंचांग के अनुसार माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी का त्योहार माना जाता है। इस बार पंचमी तिथि की शुरुआत 25 जनवरी को दोपहर 12 बजकर 34 मिनट से हो रही है। ये तिथि 26 जनवरी को सुबह सुबह 10 बजकर 28 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार वसंत पंचमी 26 जनवरी को ही मनाई जाएगी। इस दिन सुबह 07 बजकर 12 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त है।
basant panchami 2023
- फोटो : अमर उजाला
Basant Panchami 2023: मां सरस्वती का स्वरूप
माता सरस्वती को पीला और सफेद रंग बहुत ही प्रिय होता है। सफेद रंग पवित्रता और पीला रंग सकारात्मकता का प्रतीक होत है। मां सरस्वती हंस और मोर की सवारी करती हैं। मोर और हंस सुंदरता व नृत्य को दर्शाता है। इस कारण से माता सरस्वती को हंसवाहिनी कहा जाता है। मां सरस्वती को नदी के किनारे बैठा हुआ दिखाई देता है। नदी जीवन का अस्तित्व है। देव सरस्वती हमेशा कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। शास्त्रों मे कमल का फूल ज्ञान और पवित्रता को दर्शाता है। इसके अलावा माता के हाथों में वीणा और वेद सुशोभित होती है। वीणा और वेद, विद्या, ज्ञान, संगीत, नृत्य और कला को प्रदर्शित करते हैं।
माता सरस्वती को पीला और सफेद रंग बहुत ही प्रिय होता है। सफेद रंग पवित्रता और पीला रंग सकारात्मकता का प्रतीक होत है। मां सरस्वती हंस और मोर की सवारी करती हैं। मोर और हंस सुंदरता व नृत्य को दर्शाता है। इस कारण से माता सरस्वती को हंसवाहिनी कहा जाता है। मां सरस्वती को नदी के किनारे बैठा हुआ दिखाई देता है। नदी जीवन का अस्तित्व है। देव सरस्वती हमेशा कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। शास्त्रों मे कमल का फूल ज्ञान और पवित्रता को दर्शाता है। इसके अलावा माता के हाथों में वीणा और वेद सुशोभित होती है। वीणा और वेद, विद्या, ज्ञान, संगीत, नृत्य और कला को प्रदर्शित करते हैं।
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basant panchami 2023
- फोटो : अमर उजाला
वसंत पंचमी पर बना शुभ योग
वसंत पंचमी पर विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा और शुभ कार्य के लिए बहुत ही शुभ दिन माना जाता है। इस बार वसंत पचंमी पर बेहद ही शुभ योग बन रहा है। वसंत पंचमी के दिन शिव,गजकेसरी, हर्ष और शुभकर्तरी नाम के शुभ योग बन रहे हैं। इसके अलावा इस दिन देवगुरु बृहस्तपति और शनि अपनी-अपनी स्वंय की राशि में मौजूद रहेंगे। गुरु मीन राशि और शनि कुंभ राशि में है।
वसंत पंचमी पर विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा और शुभ कार्य के लिए बहुत ही शुभ दिन माना जाता है। इस बार वसंत पचंमी पर बेहद ही शुभ योग बन रहा है। वसंत पंचमी के दिन शिव,गजकेसरी, हर्ष और शुभकर्तरी नाम के शुभ योग बन रहे हैं। इसके अलावा इस दिन देवगुरु बृहस्तपति और शनि अपनी-अपनी स्वंय की राशि में मौजूद रहेंगे। गुरु मीन राशि और शनि कुंभ राशि में है।
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Basant Panchami 2023: ऐसे प्रगट हुईं ज्ञान की देवी मां सरस्वती
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वंसत पंचमी की तिथि पर ही विद्या और ज्ञान की देवी मां सरस्वती का प्रागट्य हुआ था। इस कारण से ही इस दिन इनकी विशेष पूजा-आराधना की जाती है। मां सरस्वती की उत्पत्ति कैसे हुई इसके पीछे एक कथा है जिसके अनुसार जब भगवान ब्रह्राजी ने सृष्टि की रचना की तब समूची सृष्टि में कोई भी स्वर या ध्वनि नहीं थी। तब ब्रह्रााजी ने अपने कमंडल से पृथ्वी पर जल छिड़का। पृथ्वी पर जल की बूंदे पड़ते ही 6 भुजाओं वाली देवी प्रगट हुईं। जिनके हाथों में वीणा, माला, वेद, पुष्प और कमंडल थी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वंसत पंचमी की तिथि पर ही विद्या और ज्ञान की देवी मां सरस्वती का प्रागट्य हुआ था। इस कारण से ही इस दिन इनकी विशेष पूजा-आराधना की जाती है। मां सरस्वती की उत्पत्ति कैसे हुई इसके पीछे एक कथा है जिसके अनुसार जब भगवान ब्रह्राजी ने सृष्टि की रचना की तब समूची सृष्टि में कोई भी स्वर या ध्वनि नहीं थी। तब ब्रह्रााजी ने अपने कमंडल से पृथ्वी पर जल छिड़का। पृथ्वी पर जल की बूंदे पड़ते ही 6 भुजाओं वाली देवी प्रगट हुईं। जिनके हाथों में वीणा, माला, वेद, पुष्प और कमंडल थी।