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Baisakhi 2025: आज है खुशियों और समृद्धि का पर्व बैसाखी ? जानें सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व

Sun, 13 Apr 2025 06:41 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Sun, 13 Apr 2025 06:41 AM IST
सार

Baisakhi Importance: बैसाखी का पर्व हर साल मेष संक्रांति के साथ मनाया जाता है। यह पर्व खुशियों, समृद्धि और एकता का प्रतीक है, खासकर सिख समुदाय के लिए। आइए जानते हैं बैसाखी की सही तिथि, इसका सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व।
 

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Baisakhi 2025 Date Cultural Significance and dharmik mahatv How It Is Celebrated
Baisakhi - फोटो : freepik

Baisakhi Date: बैसाखी का पर्व हर साल अप्रैल महीने में मनाया जाता है और यह खासतौर पर उत्तर भारत में अत्यधिक धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से कृषि से जुड़ा हुआ है और नई फसल की कटाई की खुशी में मनाया जाता है। साथ ही, बैसाखी का पर्व सिख समुदाय के लिए धार्मिक महत्व भी रखता है, क्योंकि इस दिन गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी।



बैसाखी, जिसे मेष संक्रांति भी कहा जाता है, भारतीय समाज की संस्कृति और परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह दिन न केवल कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि सिखों के लिए एक ऐतिहासिक और धार्मिक दिन भी है। इस दिन का उत्सव कृषि, समाज, और धर्म के संगम का प्रतीक है, जहां लोग खुशी और समृद्धि की कामना करते हैं और सामाजिक एकता को बढ़ावा देते हैं।  बैसाखी का पर्व भारतीय संस्कृति की विविधता और एकता को प्रदर्शित करने वाला एक महत्वपूर्ण अवसर है। आइए जानते हैं कब मनाई जाएगी बैसाखी और क्या है इसका सामाजिक और धार्मिक महत्व। 

 

Baisakhi 2025 Date Cultural Significance and dharmik mahatv How It Is Celebrated
Baisakhi - फोटो : freepik

बैसाखी की तिथि 
बैसाखी हर साल मेष संक्रांति के दिन मनाई जाती है, जो आमतौर पर 13 या 14 अप्रैल को होती है। इस साल यह पर्व 13 अप्रैल, 2025 को मनाया जाएगा। इस दिन की महत्ता कृषि क्षेत्र में काम करने वाले किसानों के लिए बहुत अधिक है, क्योंकि यह नई फसल की बुवाई और कटाई का समय होता है। यह दिन खुशहाली और समृद्धि की ओर इशारा करता है।

Baisakhi 2025 Date Cultural Significance and dharmik mahatv How It Is Celebrated
Baisakhi - फोटो : freepik

बैसाखी का सांस्कृतिक महत्व
बैसाखी का पर्व भारतीय समाज में एक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से कृषि प्रधान समाज के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि बैसाखी के दिन नई फसल की कटाई होती है। किसानों के लिए यह दिन खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक होता है, क्योंकि उन्हें अपनी मेहनत का फल मिल रहा होता है। खासकर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में यह पर्व बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन को किसान अपनी नई फसल की खुशहाली के रूप में मनाते हैं, और पारंपरिक तरीके से खेतों में काम करते हुए ढेर सारी खुशियां मनाते हैं।

इसके साथ ही, बैसाखी का पर्व सामूहिक उत्सव का रूप भी धारण करता है। समाज के लोग एक साथ मिलकर नृत्य, संगीत और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। पंजाब में 'भांगड़ा' और 'गिद्दा' जैसे पारंपरिक नृत्य होते हैं, जो न केवल आनंद का स्रोत होते हैं, बल्कि एकता और भाईचारे को भी बढ़ावा देते हैं। यह दिन अपने आप में खुशी और एकजुटता का प्रतीक होता है, जब लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर खुशी बांटते हैं और जीवन के नए चक्र की शुरुआत का स्वागत करते हैं।

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Baisakhi 2025 Date Cultural Significance and dharmik mahatv How It Is Celebrated
Baisakhi - फोटो : freepik

बैसाखी का धार्मिक महत्व
बैसाखी का पर्व सिख धर्म में विशेष धार्मिक महत्व रखता है। यह दिन सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा खालसा पंथ की स्थापना का प्रतीक है। गुरु जी ने इस दिन सभी जातिगत भेदभावों को समाप्त कर दिया था और एकता का संदेश दिया था। यह पर्व सिखों के लिए एक नया अध्याय, एक नई शुरुआत और धार्मिक सिद्धांतों के पालन का दिन है। गुरु गोबिंद सिंह जी के नेतृत्व में खालसा पंथ की स्थापना ने समाज को एकजुट करने के लिए एक मजबूत कदम उठाया था।

बैसाखी पर सिख धर्मावलंबी गुरुद्वारों में विशेष पूजा और अरदास करते हैं। इस दिन विशेष रूप से गुरुद्वारों में भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है और नगर कीर्तन की परंपरा निभाई जाती है। लोग इस दिन को अपने पवित्र कर्तव्यों को याद करने, गुरु के बताए मार्ग पर चलने और धर्म के प्रति अपनी आस्था को और गहरा करने का अवसर मानते हैं। बैसाखी का पर्व सिख धर्म के लिए एक समय होता है जब वे अपने गुरु की शिक्षा और खालसा पंथ के महत्व को मानते हुए एकजुट होते हैं और समाज में शांति, भाईचारे और समानता का प्रचार करते हैं।

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Baisakhi 2025 Date Cultural Significance and dharmik mahatv How It Is Celebrated
Baisakhi - फोटो : Adobe stock

कैसे मनाते हैं बैसाखी
बैसाखी के दिन लोग अपने घरों को सजाते हैं, विशेष पूजा करते हैं और गुरुद्वारों में अरदास की जाती है। सिख समुदाय में इस दिन को खास धार्मिक महत्व मिलता है, क्योंकि इसी दिन गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी। इस दिन गुरुद्वारों में विशेष प्रार्थनाएं होती हैं, नगर कीर्तन निकाले जाते हैं और समाज में भाईचारे का संदेश दिया जाता है। इसके अलावा, लोग इस दिन नई फसल के आगमन की खुशी में एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और पारंपरिक गीत गाते हैं। बैसाखी को उत्तर भारत में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है, खासकर पंजाब में, जहां इस दिन विशेष मेलों का आयोजन होता है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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