प्राय: महिला दिवस के दिन, या उसके आसपास सोशल मीडिया पर महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर तमाम पोस्ट भरे रहते हैं। ऐसा लगता है मानो यकायक ही पूरा देश महिलाओं के सम्मान को लेकर सजग हो गया हो। लेकिन दुख की बात यह है कि सशक्तिकरण का यह चोगा जितना खूबसूरत दिखता है, जमीनी सच्चाई उतनी ही भयावह है। हाल ही में ट्रू कॉलर द्वारा जारी किए गए एक रिपोर्ट में मोबाईल फोन द्वारा महिला उत्पीड़न की घटनाओं के चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं।
2 of 5
आपत्तिजनक कॉल या मेसेज से परेशान होती हैं महिलाएं
- फोटो : Truecaller
रिपोर्ट के मुताबिक साल 2019 में हर 3 में से 1 भारतीय महिला आपत्तिजनक फोन कॉल या मेसेज के जरिए उत्पीड़न का शिकार होती रही। इनमें से 52 प्रतिशत महिलओं को सप्ताह में एक बार आपत्तिजनक कॉल या मेसेज आते हैं। वहीं 45 प्रतिशत महिलाएं बताती हैं कि उन्हें हफ्ते में लगभग एक बार परेशान करने वाली वीडियो या फोटो वाले मेसेज आते हैं।
3 of 5
ऐसी घटनाओं के बाद क्या महसूस करती हैं महिलाएं
- फोटो : Truecaller
20 प्रतिशत महिलाओं को सप्ताह में दो बार इस तरह के कॉल आते हैं। एक सप्ताह में 3-5 बार ऐसे आपत्तिजनक कॉल से परेशान होने वाली महिलओं की संख्या 19 प्रतिशत है। वहीं 9 प्रतिशत महिलओं को लगभग रोज ही ऐसे आपत्तिजनक कॉल आते हैं।
4 of 5
हर तीसरी महिला को आते हैं स्पैम कॉल
देशभर के 14 बड़े शहरों में किए गए सर्वे के मुताबिक ऐसे कॉल्स से परेशान महिलाओं ने छुटकारा पाने के लिए अलग-अलग कदम उठाए। इस मामले में दिल्ली की महिलाएं सबसे ज्यादा सश्क्त पाई गई। दिल्ली की 28 प्रतिशत महिलाओं ने ऐसे कॉल्स या मेसेज को ब्लॉक या इग्नोर करने के बजाय उसकी शिकायत करने का फैसला लिया।
5 of 5
महिलाओं ने उठाए ये कदम
- फोटो : Truecaller
रिपोर्ट के अनुसार, जिन महिलाओं के पास इस तरह के कॉल या मेसेज आते हैं, वे सबसे बेहतर उपाय मानती हैं कि ऐसे नंबरों को ब्लॉक कर दिया जाए। 92 फीसदी महिलएं ऐसे नंबरों को ब्लॉक कर देती हैं, जबकि 51 प्रतिशत महिलाएं कॉल ब्लॉकिंग ऐप डाउनलोड करती हैं। वहीं 38 प्रतिशत महिलओं ने पुलिस से इसकी शिकायत की, जबकि 11 प्रतिशत महिलाओं ने अपना फोन नंबर बदलने का फैसला लिया।
कमेंट
कमेंट X