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वो 15 महिलाएं, जिनका संविधान निर्माण में है अमूल्य योगदान

Sat, 18 Jan 2020 03:18 PM IST
प्राची प्रियम लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: प्राची प्रियम Updated Sat, 18 Jan 2020 03:18 PM IST
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26 january Republic Day Role of women in drafting Indian Constitution 
संविधान निर्माण में योगदान देने वाली महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
भारतीय संविधान अपनाए जाने के बाद 26 जनवरी 1950 को इसे लागू किया गया था। संविधान सभा में कुल 379 सदस्य थे, जिनमें से हमें कुछ गिने चुने नाम ही याद हैं। यह विडंबना है कि सभा में शामिल मातृ शक्तियों को हम भूल चुके हैं। इस बार हम आपको याद दिला रहे हैं उन महिलाओं की जिन्होंने संविधान निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है। 

 
26 january Republic Day Role of women in drafting Indian Constitution 
अम्मू स्वामीनाथन - फोटो : social media
अम्मू स्वामीनाथन
केरल के पालघाट जिले के अनाकारा में जन्मीं अम्मू स्वामीनाथन साल 1946 में मद्रास निर्वाचन क्षेत्र से संविधान सभा का हिस्सा बनी थीं। 24 नवंबर 1949 को संविधान के मसौदे को पारित करने के लिए अम्मू ने एक भाषण में कहा था कि ‘बाहर के लोग कह रहे हैं कि भारत ने अपनी महिलाओं को बराबर अधिकार नहीं दिए हैं। अब हम कह सकते हैं कि जब भारतीय लोग स्वयं अपने संविधान को तैयार करते हैं तो उन्होंने देश के हर दूसरे नागरिक के बराबर महिलाओं को अधिकार दिए हैं।‘

अम्मू साल 1952 में लोकसभा और साल 1954 में राज्यसभा की सदस्य भी रहीं। उन्होंने साल 1960-65 में भारत स्काउट्स एंड गाइड और सेंसर बोर्ड की भी अध्यक्षता की।

 
26 january Republic Day Role of women in drafting Indian Constitution 
दक्षिणानी वेलायुद्ध  - फोटो : फाइल फोटो
दक्षिणानी वेलायुद्ध 
4 जुलाई 1912 को कोचीन में बोल्गाटी द्वीप में जन्मीं दक्षिणानी वेलायुद्ध समाज के शोषित वर्गों की नेता थी। साल 1945 में, दक्षिणानी को कोचीन विधान परिषद में राज्य सरकार द्वारा नामित किया गया था। वह साल 1946 में संविधान सभा के लिए चुनी गयीं पहली और एकमात्र दलित महिला थीं।


 
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26 january Republic Day Role of women in drafting Indian Constitution 
बेगम एजाज रसूल - फोटो : फाइल फोटो
बेगम एजाज रसूल
बेगम एजाज रसूल संविधान सभा की एकमात्र मुस्लिम महिला सदस्य थी। साल 1950 में, भारत में मुस्लिम लीग भंग होने के बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गयी थीं। वह साल 1952 में राज्यसभा के लिए चुनी गयी थी और साल 1969 से साल 1990 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा की सदस्य रही। साथ ही, साल 1969 से साल 1971 के बीच, वह सामाजिक कल्याण और अल्पसंख्यक मंत्री भी रही। इसके बाद साल 2000 में उन्हें पद्म भूषण पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

 
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26 january Republic Day Role of women in drafting Indian Constitution 
दुर्गा बाई देशमुख

दुर्गाबाई देशमुख 
बारह वर्ष की उम्र में गैर-सहभागिता आंदोलन(Non Co-operation movement) में भाग लेने वाली दुर्गाबाई देशमुख बाल्य काल से ही समाज सेवा में आगे थीं। 15 जुलाई 1909 को जन्मीं दुर्गाबाई ने साल 1936 में आंध्र महिला सभा की स्थापना की, जो आगे चलकर शिक्षा और सामाजिक कल्याण का एक बहुचर्चित संस्थान बना।

दुर्गाबाई केंद्रीय सामाजिक कल्याण बोर्ड, राष्ट्रीय शिक्षा परिषद और राष्ट्रीय समिति पर लड़कियों और महिलाओं की शिक्षा जैसे कई केंद्रीय संगठनों की अध्यक्ष थीं। वह संसद और योजना आयोग की सदस्य भी थीं। साल 1971 में भारत में साक्षरता के प्रचार में उत्कृष्ट योगदान के लिए दुर्गाबाई को चौथे नेहरू साहित्यिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। साल 1975 में, उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।

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