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ईरान की 'द ब्लू गर्ल' सहर खोडयारी जो बनी महिला अधिकारों की आवाज

Tue, 14 Jan 2020 11:00 AM IST
नवनीत राठौर वीना नागपाल
वीना नागपाल Published by: नवनीत राठौर Updated Tue, 14 Jan 2020 11:00 AM IST
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Iran's The Blue Girl Sahar Khodayari who became the voice of women's rights
सहर खोडयारी - फोटो : सोशल मीडिया

हांलाकि उस नीली लड़की की बात बहुत दुख भरी है लेकिन वह अफगानिस्तान, ईरान और यहां तक कि सऊदी अरब की महिलाओं व युवतियों की आजादी और उनके अधिकारों का सिंबल बन गई है। उसको लेकर अब विश्व भर में महिला मुक्ति की आवाजें सुनाई देने लगी हैं क्योंकि अभी तक दुनिया में ऐसे छोटे-बड़े कई कोने मौजूद हैं जहां महिला अधिकारों की बात भी करना एक गुनाह है। दरअसल, महिलाएं न जाने कितनी बंदिशें और पाबंदियों में कैद है। उनका अपना कोई वजूद है ही नहीं। वह जिंदगी का उतना भर टुकड़ा जी पाती हैं जितना कि एक मर्द उसे बख्श देता है। यह अमानवीयता अभी तक चली आ रही है।

Iran's The Blue Girl Sahar Khodayari who became the voice of women's rights
सहर खोडयारी - फोटो : सोशल मीडिया

क्या इस तरह की पाबंदी के बारे में कोई सोच सकता है? 
क्या यह भी कोई गुनाह हो सकता है कि कोई युवती स्टेडियम न जा सके और अपनी मनपसंद टीम को फुटबॉल मैच खेलता न देख सके। अपनी मनपसंद टीम की हौसला अफजाई न कर सके। हम तो इस तरह की पाबंदी के बातें सोच भी नहीं सकते हैं। हम इस मामले में न केवल आगे हैं बल्कि यहां क्रिकेट मैच के दौरान जिस तरह से महिला पुरुषों की बराबर संख्या से भरा होता है और युवतियां जैसे अपनी मनपंसद टीम को चीयर्स करती हैं वह दृश्य ही यह बताने के लिए काफी है कि यहां महिलाएं कितनी स्वतंत्र और मुक्त हैं। यहां युवतियां न केवल चीयर्स करती हैं बल्कि स्वयं भी खेलती हैं। लेकिन अभी तक भी कुछ देशों में स्टेडियम तक भी महिलाओं को जाने की मनाही है।

Iran's The Blue Girl Sahar Khodayari who became the voice of women's rights
'द ब्लू गर्ल' - फोटो : सोशल मीडिया

ईरान उनमें से एक है। वहीं उस युवती के साथ दुख भरी घटना घटी। वह युवती सहर खोदीयारी स्टेडियम में प्रवेश करना चाहती थी क्योंकि उसकी मनपसंद टीम अस्तेगहलाल एफसी का आज मैच था। उसकी यह प्रिय टीम नीली जर्सी पहनकर खेलती है तो सहर ने भी नीली वेशभूषा ही पहनी थी। लेकिन सहर को स्टेडियम में नहीं जाने दिया गया। उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया। सहर इससे इतना आहत हुई कि अपना विरोध जताने के लिए उसने स्वयं को आग लगा ली। सहर की इस तरह से मौत ने सबको दहला दिया। अब तो चारों तरफ से महिला स्वतंत्रता और अधिकारों की आवाजें उठने लगीं।

पिछले माह यानी की सितंबर में अफगानिस्तान में फुटबॉल मैचों का एक सिलसिला चला। महिलाओं, पुरुषों, युवतियों, युवकों ने हाथ में प्लेकार्ड लिए हुए थे। जिस पर लिखा था कि- "हम उस नीली लड़की के साथ हैं।" वैसे तो अन्तर्राष्ट्रीय जगत् में सहर के लिए सहानुभूति की लहर उठ खड़ी हुई है। ईरान की बहुत आलोचना हुई। क्या किसी देश में एक महिला का जन्म लेना ही गुनाह है कि उस पर इतनी पाबंदियां लगाई जाएं। सहर को ब्ल्यू गर्ल इसीलिए कहा गया है, क्योंकि उसने अपनी मनपसंद टीम की जर्सी नीली रंग के ही कपड़े पहने थे।

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Iran's The Blue Girl Sahar Khodayari who became the voice of women's rights
सहर खोडयारी - फोटो : सोशल मीडिया

अफगानिस्तान के जिस स्टेडियम में ईरानी युवती सहर खोदियारी के समर्थन में महिला व पुरुषों ने इतनी अधिक संख्या में प्लेकार्ड लिए हुए थे तो कभी उसी स्टेडियम में महिला व पुरुषों को तालिबान हुकुमत के समय में क्रूर सजा यूं सरेआम दी जाती थी। आज उसी स्टेडियम में महिला व पुरुष न केवल मैच देखते हैं बल्कि वहां दोनों के ही कई स्पोर्ट्स भी होते हैं। कितने आश्चर्य की बात है कि सहर जिस टीम को सपोर्ट करती थी एस्टेगहलाल एफसी उसका फारसी में मतलब होता है। स्वतंत्रता और जिस स्टेडियम में वह मैच देखने के लिए प्रवेश करना चाहती थी उस स्टेडियम का नाम है आजादी स्टेडियम। लेकिन सहर के लिए आजादी एक दुस्वप्न बन कर रह गई।

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Iran's The Blue Girl Sahar Khodayari who became the voice of women's rights
सहर खोडयारी - फोटो : सोशल मीडिया

खुशी की बात यह है कि स्टेडियम में न केवल युवतियों ने बल्कि पुरुषों ने भी उनके साथ मिलकर सहर के समर्थन में नारे लगाए। बात यहां तक पहुंच गई है कि एमन्स्टी इंटरनेशनल ने फीफा और एशियन फुटबॉल कन्फेडेरेशन से एक्शन लेने की अपील की है। अफगानी महिला अधिकारों के संघ की कार्यकर्ता मरियम अताही ने कहा महिलाओं का स्टेडियम में मैच देखना कतई धर्म विरुद्ध नहीं है। यह कोई गुनाह भी नहीं है। इस अफगानी कार्यकर्ता मरियम अताही ने कहा हमने तालिबानी हुकूमत में बहुत कुछ सहा है। हमें कुचला गया, दबाया गया और बेकसूर होते हुए भी सजाएं दी गई। अब हम ऐसा नहीं होने देंगे। हम केवल अपने लिए ही नहीं बल्कि सभी महिलाओं के अधिकारों के लिए फिर चाहे वह किसी भी मुल्क किसी भी स्थान और धर्म की क्यों न हों मिलकर आवाज उठाएंगे। इस बात को लिखते-लिखते खबर आई कि दशकों बाद ईरान की महिलाओं को स्टेडियम में जाने की अनुमति मिल गई और तेहरान स्टेडियम में उन्होंने फीफा सॉकर (फुटबॉल) मैच देखा। इसी आजादी स्टेडियम में महिलाओं को आजादी मिली। सहर की कुर्बानी ने महिलाओं को आजादी दिला दी। नीली लड़की की नीलम आभा फैल गई। 
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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