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International Women's Day 2020: समाज की ऐसी पांच महिलाएं जिनके बेमिसाल हौसले ने दिलाई अलग पहचान

Sun, 08 Mar 2020 09:15 AM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अपराजिता शुक्ला Updated Sun, 08 Mar 2020 09:15 AM IST
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International Women's day 2020: Impressive woman personality in sports entrepreneurship photography
- फोटो : Social Media

हौसलों को पंख मिल जाएं, तो कोई पीछा नहीं कर सकता। अपने देश की नारियों ने हमेशा से दुनिया में अलग जगह बनाई है। अब तो महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़कर टक्कर दे रही हैं। शायद ही कोई क्षेत्र ऐसा बचा हो, जिसमें उन्होंने समाज को चुनौती न दी हो। महिला दिवस के मौके पर ऐसी बेमिसाल महिलाओं का जिक्र लाजिमी है और जरूरी भी। हौसला, जज्बा, जुनून लिंगभेद को भी मात दे देता है। तभी तो देश की अनेक महिलाएं अपने क्षेत्र में पुरुषों से भी 'बीस' साबित हुई हैं। किसी के जुनून ने उसे लेखक बना दिया, तो कोई अपने जज्बे में जंगल की दुनिया में रम गई। प्रस्तुत है ऐसी ही पांच महिलाओं की अद्भुत कहानियां।

International Women's day 2020: Impressive woman personality in sports entrepreneurship photography
- फोटो : Social Media

रुपये उधार लेकर फैलाई स्वाद की खुशबू

निलजा वांग्मो उस संघर्षशील महिला का नाम है, जिसने दुर्गम पहाड़ी गांव में जन्म लेने के बाद भी अपनी अलग पहचान बनाई। उनका जन्म अलची गांव में हुआ, जो लद्दाख की राजधानी लेह से लगभग 70 किलोमीटर नीचे सिंधु नदी के तट पर स्थित है। ऐसे दुर्गम स्थान से ज्यादा दुश्कर हालात निलजा के जीवन में तब आ गए, जब उन्होंने अपने पिता को खो दिया। तंगहाली की वजह से कॉलेज की पढ़ाई बीच में ही छूट गई। निलजा को बचपन से विभिन्न प्रकार के व्यंजन पकाने का शौक था। उन्होंने शौक को ही कॅरियर बनाने की ठान ली, और ‘अलची किचन’ नाम से लद्दाखी रेस्टोरेंट की शुरुआत की। फिर ‘अलची किचन’ के खास मैन्यू पर कसरत की और ऐसे लद्दाखी व्यंजनों को खोजा, जो लुप्त हो चुके थे। आज इस किचन की फर्मेंटेड ब्रेड खंबीर और ताशी ताग्ये चाय सबसे ज्यादा पसंद की जाती है।

International Women's day 2020: Impressive woman personality in sports entrepreneurship photography
- फोटो : Social Media
छोटी-सी उम्र में किए बड़े काम
जिस उम्र में बच्चे बेपरवाह होकर जिंदगी का लुत्फ उठाते हैं, उस उम्र में रजिया सुल्तान ने देश और अपने गांव का नाम रोशन कर दिया। मेरठ के गांव नंगला कुंभा में जन्मीं रजिया बचपन में फुटबॉल सिलने का काम करती थीं। उसके बाद वह पढ़ाई करतीं। तभी उनके मन में विचार आया कि जो बच्चे दिन भर बाल मजदूरी करते हैं, वे तो कभी पढ़ ही नहीं पाते हैं। वह ‘बचपन बचाओ’ आंदोलन के साथ जुड़ गईं। इस आंदोलन के कैंपेन के तहत उन्हें गांव का बाल प्रधान चुना गया। जब वह छठी कक्षा में थीं, तो उन्होंने बाल मजदूरी में लगे बच्चों को स्कूल जाने के लिए प्रेरित करना शुरू किया।  छोटी-सी उम्र में बड़े कार्यों को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ ने उनको 'मलाला अवार्ड' से सम्मानित किया। 21 साल की रजिया, मदर टेरेसा को आदर्श मानती हैं। अपने सपने के बारे में दो टूक कहती हैं, "मैं बाल मजदूरी खत्म करना चाहती हूं, न केवल मेरे गांव में, बल्कि पूरे देश से।"
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International Women's day 2020: Impressive woman personality in sports entrepreneurship photography
- फोटो : Social Media

भूकंप-सुनामी को बनाया जिंदगी का मकसद

भूकंप हो या सुनामी, दोनों तबाही के मंजर दिखाते हैं। इनका नाम ही हमें खौफ से भर देता है। लेकिन भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलूरू में प्रोफेसर कुसल राजेंद्रन ने भूकंप और सुनामी को ही अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया। दक्षिण भारतीय परिवार में जन्मीं कुसल पढ़ाई के लिए पहले तिरुवनंतपुरम से केरल और फिर आई.आई.टी. रुड़की गईं। भू-भौतिकी (जियोफिजिक्स) में मास्टर्स के दौरान वह छह छात्रों में एकमात्र छात्रा थीं। भारतीय विज्ञान संस्थान में उन्होंने बतौर एसोसिएट प्रोफेसर प्रवेश किया। वहां उनकी मुलाकात प्रसिद्ध भू-विज्ञानी सी.पी. राजेंद्रन से हुई। बाद में दोनों ने विवाह कर लिया। दक्षिण भारत के कावेरीपट्टनम शहर में सुनामी आई, तो कुसल और उनके पति ने रिसर्च शुरू की। 2004 में मिट्टी के अवशेष से उन्होंने साबित किया कि एक हजार साल पहले भी उस स्थान पर ऐसी ही सुनामी आई थी। कुसल को 'नेशनल अवार्ड फॉर वुमन साइंटिस्ट' से भी सम्मानित किया जा चुका है।

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International Women's day 2020: Impressive woman personality in sports entrepreneurship photography
- फोटो : Social Media

जुनून ने बनाया वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर

राधिका रामासामी को फोटोग्राफी और यात्राओं का शौक तो बचपन से था, लेकिन कैमरे से प्यार 11वीं कक्षा में पढ़ने के दौरान तब हुआ, जब अंकल ने उन्हें एसएलआर कैमरा भेंट किया। कैमरा पाते ही राधिका का शौक जुनून में बदल गया। तमिलनाडु के थेनी शहर में जन्मीं राधिका 2004 में जब परिवार के साथ घूमने भरतपुर नेशनल पार्क गईं, तो उन्हें प्रकृति से प्यार हो गया। दिल्ली लौटीं तो रोजाना लगभग दो घंटे दिल्ली के ओखला बर्ड सैंक्चुएरी में बिताने लगीं। उन्हें वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी करते 25 साल गुजर चुके हैं। वैसे वह सभी नेशनल पार्कों के अलावा केन्या और तंजानिया की यात्राएं कर चुकी हैं। राधिका बताती हैं, "हमें आई-लेवल फोटोग्राफी करनी होती है। गरमी के मौसम में जानवर सुबह पानी की तलाश में निकलते हैं। तब हम वन कर्मचारियों के साथ जंगल में वाटर बॉडीज पर जाते हैं।" राधिका रामासामी को देश की पहली प्रोफेशनल वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर होने का गौरव हासिल है।

 

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