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बड़ा खुलासा: जानिए, आखिर मंगल ग्रह पर है कितना पानी?

Tue, 29 Sep 2015 08:00 AM IST
Updated Tue, 29 Sep 2015 08:00 AM IST
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बड़ा खुलासा: जानिए, आखिर मंगल ग्रह पर है कितना पानी?

Water on the red planet: Nasa reveals major discovery– in pictures

हमारी धरती के बाद अब मंगल ग्रह पर भी जीवन की उम्मीद बढ़ गई है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने सोमवार को नया खुलासा किया है कि लाल ग्रह पर तरल रूप में बहते हुए पानी के पर्याप्त भंडार हैं। यह पानी नमकीन रूप में है। नासा ने हाल ही में कहा था कि वह जल्द ही बड़ा खुलासा करने वाला है, तभी से लाल ग्रह के बारे में दुनिया भर में उत्सुकता बढ़ गई थी। धरती के बाद किसी दूसरे ग्रह पर पहली बार बहते हुए पानी के साक्ष्य पाए जाने का खुलासा हुआ है। अमेरिका और फ्रांस के वैज्ञानिकों की टीम ने यह पता लगाया है कि मंगल की सतह पर बड़ी मात्रा में नमक और खनिज से भरपूर तरल रूप में पानी है।

बड़ा खुलासा: जानिए, आखिर मंगल ग्रह पर है कितना पानी?

Water on the red planet: Nasa reveals major discovery– in pictures

वैज्ञानिकों के इस नतीजे से अब तक मंगल पर पानी के होने के दावे पर एक तरह से मुहर लग गई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि मंगल पर 2011 में यान मार्स रिकोनेसेंस ऑर्बिटर से प्राप्त तस्वीरों में जो गहरी लकीरें पाई गई थीं, वे दरअसल बहता हुआ तरल पानी ही है, जो मंगल के कई हिस्सों में देखी गई थीं। अटलांटा में जॉर्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेकभनॉलॉजी में वैज्ञानिक और शोध के सह लेखक व नेपाली वैज्ञानिक लुजेंद्र ओझा कहते हैं कि हमारा शोध भविष्य में इस दिशा में आगे बढ़ने में सहायक होगा। नासा के तारामंडल विज्ञान निदेशक जिम ग्रीन ने कहा कि नए शोध ने यह तय कर दिया है कि मंगल शुष्क ग्रह नहीं है, यह अब अतीत की बात हो गई है। तरल पानी की मौजूदगी से मंगल पर जीवन की संभावना बढ़ गई है।

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Water on the red planet: Nasa reveals major discovery– in pictures

पानी की मौजूदगी से नासा के 2030 में अगले मानव मिशन को भेजा जाना आसान हो जाएगा। सबसे अहम बात यह है कि विरल हवा वाले मंगल ग्रह पर पाए गए ये नमक पानी के जमने और भाप बनने के तापमान को भी बदल सकते हैं, जिससे पानी ज्यादा समय तक सतह पर बह सकता है। इससे पहले शोधकर्ता अब तक यह कयास लगाते रहे हैं कि क्या अब भी मंगल की सतह पर पानी बहता होगा। वैज्ञानिकों का अनुमान था कि मंगल पर जमी हुई बर्फ के रूप में पानी है।  इसी साल नासा के यान क्यूरियोसिटी ने भी मंगल की सतह पर पानी होने के ठोस सबूत दिए थे। यह शोध जर्नल नेचर जियोसाइंस में प्रकाशित हुआ है।

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Water on the red planet: Nasa reveals major discovery– in pictures

माना जा रहा है कि मंगल पर पानी इतनी बड़ी मात्रा में मौजूद है कि उससे सैकड़ों झीलें और नदियां बन सकती हैं। ये लकीरें सैकड़ों मीटर लंबी और पांच मीटर चौड़ी तक पाई गई हैं। नासा का यह खुलासा उस वक्त हुआ है, जब अभिनेता मैट डिमोन की हॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘द मार्सियन’ की चर्चा गर्म है। यह फिल्म मंगल ग्रह पर भेजे जाने वाले एक मिशन के बारे में है, जिसमें अभिनेता को मरा हुआ जानकर मंगल पर ही अंतरिक्ष यात्री छोड़ देते हैं, जो किसी तरह वहां के वातावरण से तालमेल बिठाते हुए आखिर में धरती पर सकुशल वापस आ जाता है।

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नासा की ओर से लाल ग्रह पर पानी के निशान खोजने में सबसे बड़ी भूमिका नेपाल के युवा अंतरिक्ष विज्ञानी लुजेंद्र ओझा की रही। ओझा ही ऐसे पहले शख्स रहे जिन्होंने ठोस आधार पर अपनी खोज से नासा को यह भरोसा दिलाया कि मंगलग्रह पर पानी के निशान हो सकते हैं। इसी के बाद सोमवार को नासा ने अपने बयान में मंगल ग्रह का रहस्य सुलझाने का दावा किया। ओझा वर्तमान में अटलांटा स्थित जॉर्जिया इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी से पीएचडी कर रहे हैं।  चार साल पहले उन्होंने हाई रेज्योल्यूशन इमैजिंग साइंस एक्सपेरिमेंटल कैमरे से अध्ययन के आधार उन्होंने पानी के निशान होने की बात कही थी। ओझा की उम्र उस वक्त महज 21 साल थी और उन्होंने अपना स्नातक भी पूरा नहीं किया था। बाद में नासा ने उन्हें खोज अभियान में शामिल भी कर लिया।

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