नोबेल: पढ़िए कब-कब विवादों में आया ये पुरस्कार
नोबेल पुरस्कार। कौन नहीं जानता इस बारे में। शांति, साहित्य, अर्थशास्त्र सहित कई अन्य क्षेत्रों में सृष्टि को बेहतर योगदान देने वाले व्यक्तियों को यह इस पुरस्कार से नवाजा जाता है। इस पुरस्कार की शुरुआत स्वीडन के एल्फ्रेड नोबेल के नाम पर 1895 में की गई थी। यह पुरस्कार जितना अपनी सर्वश्रेष्ठता के लिए प्रसिद्ध है उतना ही विवादों के लिए भी। आज हम आपको आगे की स्लाइड्स में नोबेल पुरस्कार से जुड़े इन्हीं चुनिंदा विवादों के बारे में बताएंगे।
नोबेल: पढ़िए कब-कब विवादों में आया ये पुरस्कार
इस पुरस्कार पर विवादों का साया पहली बार 1970 में पड़ा, जब रूसी लेखक अलेक्सान्द्र सोल्शेनीत्सिन को साहित्य का नोबेल देने की घोषणा हुई। हालांकि सोवियत संघ लेबर कैंप्स के सभी राज खोलने के कारण उन्हें यह पुरस्कार देने पर असहमत था और उसने इस पुरस्कार को देने पर इसे शत्रुतापूर्ण कदम बताया। अलेक्जेंडर ने यह पुरस्कार अपने नाम की घोषणा के चार साल बाद तब ग्रहण किया जब वो सोवियत संघ से निर्वासित कर दिए गए।
नोबेल: पढ़िए कब-कब विवादों में आया ये पुरस्कार
अलेक्जेंडर पर उपजे विवाद के तीन साल बाद ही इस पुरस्कार से जुड़ा एक और विवाद सामने आ गया जब अमेरिका के स्टेस सेक्रटरी हेनरी किसिंगर और उत्तरी वियतनाम के नेता ली डक थो को शांति के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार दिया गया। उन्हें यह सम्मान इसलिए दिया गया क्योंकि उन्होंने वियतनाम युद्ध के दौरान सीज-फायर का एलान कराने के लिए काफी कोशिशें की थी जिसमें वे सफल भी रहे लेकिन उन्हें पुरस्कार देने के एलान के साथ ही नोबेल कमेटी के दो सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया था।
नोबेल: पढ़िए कब-कब विवादों में आया ये पुरस्कार
1970,73 के बाद यह पुरस्कार फिर से 1976 में विवादों का हिस्सा बन गया जब मिल्टन फ्रिडमैन ने जब अपना पुरस्कार लिया तो उस समय विरोध भड़क उठा। मिल्टन मुक्त बाजार के प्रस्ताव थे और उनकी संस्था का लेफ्ट विंग के सदस्यों का आपसी विवाद भी था। फ्रिडमैन अमेरिकन अर्थशास्त्री थे और रुपये से संबंधित उनके कुछ सिद्धांत भी प्रचलित हैं।
नोबेल: पढ़िए कब-कब विवादों में आया ये पुरस्कार
सन् 1976 के बाद नोबेल पुरस्कार 18 साल बाद 1994 में विवादों में आया जब शांति के क्षेत्र में यह पुरस्कार फिलिस्तीनी नेता यासीर अराफात को दिया गया था, क्योंकि उन्हें प्रायः आतंकी माना जाता रहा था। पुरस्कार के एक कमेटी मेंबर का कहना था कि वह कामना कर रही हैं कि यह पुरस्कार इजराइल समस्या के बाद रद्द हो जाए।