मुख्य शहर पेशावर से 40 किलोमीटर दूर उत्तर में है चारसद्दा स्थित बाचा खान विश्वविद्यालय। यहां सब कुछ सामान्य दिनों की तरह चल रहा था। यहीं सुबह साढ़े दस बजे खान अब्दुल गफ्फार खां की याद में मुशायरे की तैयारी थी। पांच सुरक्षा चेक थे मगर सुरक्षा घेरा सिर्फ वीआईपी लोगों के लिए था। छात्रों के लिए कोई सुरक्षा नहीं थी।
'हां, मैंने आतंकियों को देखा, उनके सिर पर खून सवार था'
Updated Thu, 21 Jan 2016 02:00 PM IST
विज्ञापन
'हां, मैंने आतंकियों को देखा, उनके सिर पर खून सवार था'
'हां, मैंने आतंकियों को देखा, उनके सिर पर खून सवार था'
'हां, मैंने आतंकियों को देखा, उनके सिर पर खून सवार था'
विज्ञापन
विज्ञापन