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शायद अगली पीढ़ी को न दिखें ये 10 चीजें

Sat, 13 Dec 2014 11:27 AM IST
Updated Sat, 13 Dec 2014 11:27 AM IST
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शायद अगली पीढ़ी को न दिखें ये 10 चीजें

next generation may not be able to see these things

डायल-अप- डायल-अप इंटरनेट चलाने का एक तरीका है। इसका आविष्कार 1989 में हुआ था। आज के समय में इसका इस्तेमाल सिर्फ उन स्थानों पर होता है, जहां पर ब्रॉडबैंड सर्विस उपलब्ध नहीं है। तेजी से बढ़ रही ब्रॉडबैंड और वाई-फाई टेक्नोलॉजी आने वाली पीढ़ी तक शायद डायल-अप को पहुंचने भी न दे।

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टाइपराइटर- टाइपराइटर का आविष्कार 1860 के दशक में हुआ था। 1980 का दशक खत्म होते-होते कम्प्यूटर इसकी जगह लेने लगा और तेजी से टाइपराइटर का इस्तेमाल कम हो गया। जल्द ही कम्प्यूटर इसे पूरी तरह से खत्म कर देगा।

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फोटो अलबम- यादों को सहेज कर रखने का सबसे अच्छा तरीका है फोटो अलबम, लेकिन आजकल लोग फोटो को अलबम में रखने के बजाए, अपने कम्प्यूटर में रखना पसंद करते हैं। हो सकता है कि आने वाली पीढ़ी को फोटो अलबम देखने को भी न मिले।

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लैंड लाइन फोन- कभी लैंड लाइन फोन लगवाने के लिए कई महीनों का वेटिंग पीरियड हुआ करता था, लेकिन मोबाइल की वजह से अब लैंडलाइन का इस्तेमाल काफी कम हो गया है। आने वाले समय में मोबाइल पूरी तरह से लैंडलाइन की जगह ले लेगा।

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एसटीडी बूथ- एसटीडी की शुरुआत 1958 के करीब हुई थी। एसटीडी बूथ पर अपने परिजनों से बात करने के लिए लोगों की लाइन लगा करती थी, लेकिन मोबाइल क्रान्ति ने एसटीडी बूथ को लगभग खत्म कर दिया है। अब हर मोबाइल पर एसटीडी की सुविधा मिलती ही है।

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