ज़हरीली शराब: 'मेरा बाप मर गया किसी और का नहीं मरेगा'
मुंबई के मलाड इलाके में मौजूद मालवणी बस्ती में जहरीली शराब से 102 लोगों की मौत धीरे धीरे एक आंकड़े से ज्यादा एक मुहिम में बदलती दिख रही है। इलाके में मीडिया की चहल पहल, पुलिस की दबिश और परिजनों के जाने के मातम के बाद नशा विरोधी गुस्सा सामने आ रहा है। इलाके की महिलांए अब अपनी चुप्पी तोड़कर एकजुट हो रही हैं, ताकि भविष्य में किसी ऐसे हादसे को रोका जा सके।
पूरी रिपोर्ट-सुशांत एस मोहन/बीबीसी संवाददाता, मुंबई
ज़हरीली शराब: 'मेरा बाप मर गया किसी और का नहीं मरेगा'
पुरानी तक़लीफ़-मालवणी इलाके में रहने वाली महिलाओं की मानें तो वे बहुत वक़्त से इलाके में बिक रही गैरकानूनी दारू से परेशान थी और इसे ख़त्म करने के लिए हर दरवाज़ा खटखटा रही थीं। इस हादसे में अपने पति को खोने वाली नसीमन कहती है, "मैं पहले पति से लड़ी, फिर दारू के अड्डे वाली से, झगड़ा बढ़ा तो पुलिस में भी गई लेकिन पुलिस ने मुझे ही चुप रहने को कहा।" कुछ ऐसी ही कहानी बयान करती है 29 साल की वर्षा जिनका पति शुक्रवार को शराब पीने गया तो लौटा ही नहीं,"मेरा पति मुझे दारू पीकर मारता था, कई बार पुलिस में कंप्लेंट दर्ज की लेकिन पुलिस मेरे ही पति को मारती थी।"
ज़हरीली शराब: 'मेरा बाप मर गया किसी और का नहीं मरेगा'
पुलिस का हफ़्ता?-इलाके की सभी औरतों का कहना था कि उन्होनें अक्सर पुलिस में गैरकानूनी शराब के विरूद्ध शिकायत दर्ज़ करवाई लेकिन सुनवाई नहीं हुई। ज़हरीली शराब बनाने के आरोपी फ़्रांसिस के घर के सामने रहने वाली सुवर्णा कहती हैं, "पुलिस ने कितनी बार छापेमारी की लेकिन हर बार फ़्रांसिस से 'कुछ' बात करने के बाद पुलिसवाले लौट जाते और वो हम पर रौब दिखाता।"
ज़हरीली शराब: 'मेरा बाप मर गया किसी और का नहीं मरेगा'
लेकिन ऐसा लग रहा है कि अब इस हादसे से सबक लेकर महिलाओं ने नशा मुक्ति आंदोलन छेड़ दिया है और मुंबई पुलिस भी इस मुहिम में उनके साथ जुट गई है। इलाके में हर जगह नशा विरोधी बैनर और पोस्टर लगे हैं साथ ही पुलिस महिलाओं के साथ मीटिंग भी कर रही है।
ज़हरीली शराब: 'मेरा बाप मर गया किसी और का नहीं मरेगा'
है। मुंबई पुलिस में डीसीपी विक्रम देशमाने कहते हैं, "घर के मर्द अगर ग़लत काम कर रहे हैं तो हम औरतों को अपना हथियार बनाएंगे क्योंकि एक औरत के लिए उसके परिवार का दुश्मन ही सबसे बड़ा दुश्मन है, और फ़िलहाल ये दुश्मन नशा है।"