आठ बातें जो मोदी नेहरू से सीख सकते हैं
योग्यता, नजरिया और नीति में नेहरू-मोदी भले ही अलग दिखें, लेकिन लोकप्रियता का ग्राफ दोनों ने छुआ। कुछ बातें हैं जो मोदी नेहरू से सीख सकते हैं।
आठ बातें जो मोदी नेहरू से सीख सकते हैं
नेहरू की सूझबूझ का लोहा पश्चिम, अरब, अफ्रीका, सुदूर पूर्व के देश और यहां तक कि कम्युनिस्ट देश मानते थे। कॉमनवेल्थ, बैंडुंग कॉनफ्रेंस, गुटनिरपेक्ष देशों के साथ जाने की नेहरू की व्यवहारिकता ने भारत को वैश्विक पटल पर एक ऊंचाई दी। वहीं मोदी में भी विदेशी नीति की पहलकदमी को लेकर एक उमंग है। मसलन चीन, रूस, अमरीका और कई विकासशील देशों को भारत में कारोबार के लिए आकर्षित करने के लिए और कुशल होने की जरूरत है। (रशीद किदवई का विश्लेषण)
आठ बातें जो मोदी नेहरू से सीख सकते हैं
नेहरू की तरह ही उन्हें अपनी कूटनीति के लिए साउथ ब्लॉक के मदारियों पर ही पूरी तरह निर्भर होने की जरूरत नहीं है। भारतीय सिनेमा, बिजनेस, आर्ट, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में काफी संभावनाएं हैं। नेहरू ने पृथ्वीराज कपूर को एक सांस्कृतिक अभियान पर दक्षिणपूर्व एशिइयाई देशों में भेजा था। मोदी चाहें तो मध्यपूर्व के देशों, अमेरिका और अन्य जगहों पर काफी लोकप्रिय शाहरुख खान को 'सांस्कृतिक डिप्लोमेसी' बढ़ाने का जरिया बना सकते है।
आठ बातें जो मोदी नेहरू से सीख सकते हैं
राज्यों के पुनर्गठन को लेकर नेहरू ने पहली बार जस्टिस फजल अली के नेतृत्व में एक आयोग का गठन किया था। तेलंगाना बनाए जाने को लेकर जो खूनखराबा हुआ उसे देखते हुए इस बात की बहुत सख्त जरूरत है कि ऐसा ही एक दूसरा आयोग बनाया जाए ताकि गोरखालैंड, विदर्भ, हरित प्रदेश, बुंदेलखंड आदि को राज्य बनाने की मांगों को निपटाया जा सके।
आठ बातें जो मोदी नेहरू से सीख सकते हैं
नेहरू ने पहली बार हिंदू कोड बिल में संशोधन की बात आगे बढ़ाई थी, जिसके बाद बहुत विवाद खड़ा हुआ। समाज में सुधार के उद्देश्य से लाया गया यह बिल पास तो हुआ लेकिन नेहरू को काफी पीछे हटना पड़ा। मोदी के पास यह मौका है कि वो लैंगिक गैरबराबरी, विरासत से संबंधित निष्पक्ष कानून, बाल कल्याण आदि विषयों पर देश का ध्यान आकर्षित कर सकें। वो चाहं संसद में बहस से पहले अपने घोषणापत्रों में इन बातों को शामिल कर सकते हैं।