क्यों लगी बरेली की कुतुबखाना मस्जिद में नमाज पर पाबंदी?
कुतुबखाना मस्जिद के बारे में दोनों पक्षों के साक्ष्य व जांच कमेटी की रिपोर्ट देखने और शहर के कई धर्मगुरुओं से मशवरा लेकर शनिवार को जिलाधिकारी गौरव दयाल ने मस्जिद का ताला खोलकर वहां मुअज्जिन (अजान देने वाले) से नमाज अदा कराने का आदेश कर दिया। मुअज्जिन देवबंदी है। मस्जिद में अस्र और मगरिब की नमाज भी हो गई लेकिन उसके बाद उग्र बरेलवियों के सड़क पर उतर आने से माहौल गरम हो गया।
सभी फोटो-ब्यूरो, अमर उजाला, बरेली।
क्यों लगी बरेली की कुतुबखाना मस्जिद में नमाज पर पाबंदी?
आधे शहर में बाजार बंद होने के साथ ही फोर्स की मौजूदगी में अघोषित कर्फ्यू जैसी स्थिति पैदा हो गई। शहर कोतवाली में बरेलवियों ने डेरा डाल दिया। यहां देर रात चली वार्ता के बाद प्रशासन ने नमाज पढ़ाने का फैसला वापस ले लिया। तय हुआ कि जब तक स्थाई इमाम की नियुक्ति नहीं हो जाती कुतुबखाना मस्जिद में कोई नमाज नहीं पड़ेगा। इसके लिए कोई समय सीमा तय नहीं की गई है।
क्यों लगी बरेली की कुतुबखाना मस्जिद में नमाज पर पाबंदी?
डीएम ने बताया कि नए इमाम की नियुक्ति के बारे में प्रशासन की कमेटी समेत सभी पक्ष कोशिश करेंगे। तब तक वहां सुरक्षा घेरा बना रहेगा।
क्यों लगी बरेली की कुतुबखाना मस्जिद में नमाज पर पाबंदी?
मगरिब की नमाज से पहले ही डीएम के इस फैसले के खिलाफ आला हजरत दरगाह पर बरेलवियों का हुजूम उमड़ पड़ा। इस बीच काफी जद्दोजहद के बाद जिला प्रशासन मस्जिद ने अस्र और मगरिब की नमाज अदा करवा दी थी। बरेलवियों के उग्र होते ही बड़ा बाजार और कुतुबखाना समेत पुराने शहर के बाजार बंद हो गए और सैकड़ों लोगों की भीड़ कुतुबखाना की तरफ बढ़ने लगी।
क्यों लगी बरेली की कुतुबखाना मस्जिद में नमाज पर पाबंदी?
इधर, प्रशासन ने आधे शहर को छावनी बना दिया था, जिससे अघोषित कर्फ्यू जैसी स्थिति हो गई। कुतुबखाना मस्जिद में भारी फोर्स की मौजूदगी के कारण भीड़ उधर नहीं जा सकी इसलिए कोई सीधा टकराव तो नहीं हुआ। बरेलवी मसलक के लोग डीएम कम्पाउंड जा रहे थे लेकिन फिर कोतवाली की तरफ मुड़ गए और वहीं डेरा डाल दिया।