क्या रात में ताजमहल का दीदार करने को तैयार हैं आप?
ताजमहल का रात्रि दर्शन रविवार को शुरू हुआ। सात ग्रुपों में रात 12 बजे तक 312 पर्यटकों ने चांदनी में नहाए बेपनाह हुस्न का दीदार किया। पर्यटकों में 201 भारतीय, 65 विदेशी और 46 बच्चे भी शामिल थे। नाइटव्यू के टिकट की महंगाई होटलों ने भुनाई। ताजगंज और फतेहाबाद रोड के होटलों ने अपनी छतों से ताज दर्शन कराने को स्पेशल डिनर की व्यवस्था की। पंचतारा होटलों ने भी विदेशी मेहमानों के लिए ऐसे ही इंतजाम किए। रविवार को 35,157 भारतीय पर्यटकों ने ताजमहल देखा। इसमे 2147 विदेशी सैलानी रविवार को आगरा ताजमहल देखने पहुंचे। इनमें से 312 टिकट सार्क देशों के पर्यटकों ने खरीदे।
क्या रात में ताजमहल का दीदार करने को तैयार हैं आप?
रात में ताज की उसी खूबसूरती को निहारने लाखों लोग पहुंचते। मुहब्बत करने वालों के साथ न जाने कितने दिलों को शरद पूर्णिमा की रात चमकी मेले में ही जोड़ा है, लेकिन आतंकियों की एक धमकी ने शरद पूर्णिमा पर सदियों से लगने वाले मेले को बंद करा दिया। अब न केवल चमकी मेला गुम हो गया, बल्कि आगरा की एक विरासत भी खो गई। शरद पूर्णिमा पर अब दीदार की अनुमति तो है, लेकिन संगीनों के साए में वह मस्ती, वह मुहब्बत गुम हो गई।
क्या रात में ताजमहल का दीदार करने को तैयार हैं आप?
तब ताज के आगोश में धड़कता था दिल-363 सालों में ताजमहल ने यमुना को उफनते और सूखते हुए देखा है। मुगलिया शहर के इकबाल को खत्म होते और हुकूमतों को बदलते देखा है। साथ ही देखा है आगरा की रवायतों और परंपराओं को खत्म होते हुए। 33 साल पहले तक शरद पूर्णिमा पर ये चमकी, वो चमकी के शोर को सुनने के साथ पूरी रात रौनक देखी है। चांदनी में नहाए ताजमहल पर जब चांद की सीधी रोशनी पड़ती तो पच्चीकारी में लगे कीमती पत्थर हीरों की तरह से जगमगाने लगते।
क्या रात में ताजमहल का दीदार करने को तैयार हैं आप?
ताजमहल में मुख्य मकबरे से यमुना किनारे की ओर संगमरमर की रेलिंग हटाकर अस्थाई सीढ़ियों को बनाया जाता था। फ्रीगंज से लकड़ी के बड़े-बड़े स्लीपर और बल्लियां लाकर अस्थाई सीढ़ियां बनाई जाती। लाखों लोगों की भीड़ के लिए रेलिंग लगाई जातीं और लेबर गेट से उन्हें बाहर निकाला जाता। दशहरा घाट रोड पर दोनों ओर मिठाईयों व अन्य सामान की दुकानें रात भर खुली रहतीं। यही नहीं, ताज के फोरकोर्ट के बागीचों में बल्लियां लगाकर अस्थाई दुकानें बनाई जाती।
क्या रात में ताजमहल का दीदार करने को तैयार हैं आप?
ताजमहल- वर्ष 1982 में करीब 33 साल पहले शरद पूर्णिमा पर ताजमहल में चमकी का मेला लगता तो पूरे शहर के होटल सैलानियों से गुलजार रहते। तीन दिन के मेले में शरद पूर्णिमा के दिन ताज सुबह सूर्योदय से रात भर खुला रहकर सुबह 4 बजे बंद होता था। उससे एक दिन पहले व एक दिन बाद में रात 2 बजे तक लोग चमकी का आनंद लिया करते थे। एएसआई के पूर्व अधिकारी डा. आरके दीक्षित के मुताबिक एक महीने पहले से ही चमकी मेले की तैयारियां शुरु हो जातीं और दूसरे स्मारकों, किला, सिकंदरा, एत्माददौला, सीकरी से एएसआई का स्टाफ आता।