तस्वीरेंः 10 छात्र नेता जो बने देश के दिग्गज राजनेता
भारत की राजनीति पर वंशवाद का साया बहुत गहरा है। पर देश में कई नेता ऐसे भी हैं जो छात्र राजनीति में अपनी पैठ बनाकर दिग्गज राजनेता बन पाए। दिल्ली विश्वविद्यालय और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में छात्र संघों का चुनाव हो रहा है। दिल्ली ही नहीं बल्कि देश कि विभिन्न विश्वविद्यालयों से चुने गए कई छात्र नेताओं का आज राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा कद है। जानिए ऐसे 10 नेताओं के बारे में।
तस्वीरेंः 10 छात्र नेता जो बने देश के दिग्गज राजनेता
लालू प्रसाद यादव पटना यूनिवर्सिटी से वकालत की पढ़ाई करते हुए पटना यूनिवर्सिटी स्टुडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष बने। 1973 में फिर छात्र संघ चुनाव लड़ने के लिए पटना लॉ कॉलेज में दाखिला लिया, और जीते। फिर जेपी आंदोलन से जुड़े और छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष बनाए गए। 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर लोक सभा चुनाव जीते। 29 साल के लालू यादव सबसे युवा सांसदों में से एक बने। 1990-97 के बीच लालू बिहार के मुख्यमंत्री रहे, लालू यादव यूपीए सरकार में 2004-09 तक रेल मंत्री भी रहे। फ़िलहाल वो राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
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नीतीश कुमार इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते हुए छात्र नेता के तौर पर उभरे। बिहार अभियंत्रण महाविद्यालय स्टुडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष बने। फिर जेपी आंदोलन में जुड़े और युवाओं की ‘छात्र संघर्ष समिति’ में अहम भूमिका निभाई। 1975-77 के बीच आपातकाल के चलते जेल जाना पड़ा। 1985 में लोक दल से विधायक चुने गए और 1989 के बाद छह बार लोकसभा की सीट जीती। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में रेल मंत्रालय भी संभाला। नीतीश कुमार वर्ष 2005 में पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने थे।
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ममता बनर्जी 1970 में कोलकाता में कांग्रेस के छात्र संगठन, ‘छात्र परिषद’, के साथ जुड़ीं और तेज़-तर्रार महिला नेता के तौर पर उभरीं। आपातकाल और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में जादवपुर लोकसभा सीट से पहली बार चुनाव लड़ीं और दिग्गज वाम नेता सोमनाथ चटर्जी को हराया। पूर्व
प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में ‘पश्चिम बंगाल यूथ कांग्रेस’ की अध्यक्ष और फिर नरसिंह राव की सरकार में मानव-संसाधन मंत्री बनीं। 1997 में कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी, ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ बनाई और 14 साल बाद, 2011 में पश्चिम बंगाल का चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बनीं।
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अजय माकन 1985 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र संघ के अध्यक्ष बने। राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाले माकन फिर दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन के ताकतवर संघ के अध्यक्ष बने। 1993, 1998 और 2003 में दिल्ली से विधायक चुने गए। 2004 में पहली बार लोकसभा में चुने गए और फिर आवास और शहरी विकास मंत्री, खेल मंत्री और गृह राज्य मंत्री रहे। साल 2015 में दिल्ली के चुनाव में कांग्रेस की अध्यक्षता की, पर एक भी सीट नहीं जीत पाए। अब वो दिल्ली कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं।