नायक या खलनायक, फिल्म से कम नहीं संजय दत्त की लाइफ
संजय दत्त आज अपना 59वां जन्दिन मना रहे हैं। संजय दत्त के पिता हिन्दू और मां मुसलमान थी, दोनो अपने जमाने के सुपरस्टार। लेकिन संजय दत्त की जिंदगी में इतने मोड़ है कि उनकी कहानी किसी फिल्म की कहानी ज्यादा लगती है। जानते हैं क्यों
नायक या खलनायक, फिल्म से कम नहीं संजय दत्त की लाइफ
1981 में पहली फिल्म रॉकी और फिर विधाता (1982) के हिट होने के बाद संजय ड्रग्स की चपेट में आ गए थे। तब पिता सुनील दत्त उन्हें मुश्किल दौर से उबारा था और तीन साल बाद 1985 में संजय ने फिल्म जान की बाजी से पहली वापसी की थी।
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संजय को नए अंदाज में पेश करने के लिए विस्तृत योजना बनाई गई है, जिसमें फिल्मों-विज्ञापनों से लेकर विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनकी उपस्थित तक की बातें शामिल हैं। खास बात ये है कि संजय भी इन चीजों पर रजामंद हैं।
नायक या खलनायक, फिल्म से कम नहीं संजय दत्त की लाइफ
पहली फिल्म की सफलता के बाद लड़खड़ा गए संजय दत्त के लिए सुनील दत्त ने दिन-रात मेहनत की थी। उनकी बहन प्रिया ने भाई को नशे की लत से निकालने के लिए बहुत दिल से मेहनत की। इसके बाद वह 1990 के शुरुआती वर्षों तक लगातार सफल रहे और नाम, इनाम दस हजार, इलाका से लेकर सड़क, साजन, खलनायक जैसी फिल्में दीं। इसके बाद 1993 में मुंबई में बम विस्फोट हुए।
नायक या खलनायक, फिल्म से कम नहीं संजय दत्त की लाइफ
मगर 1993 के मुंबई बम विस्फोटों के बाद आर्म्स एक्ट में गिरफ्तारी से उनका करिअर चार साल ठहरा रहा। तब लगा कि अब शायद ही संजय दत्त वापसी कर पाएंगे। फिल्मी पंडित उनको चुका हुआ मान चुके थे। इसके बाद संजय दत्त ने सबको चुप कर दिया।