सत्ता और प्रशासन की हकीकत बयां करती हैं ये 10 फिल्में
रिलीज होने को तैयार प्रकाश झा की फिल्म 'जय गंगाजल' एक बार फिर प्रशासन और सरकार पर सवाल उठाने को तैयार है। इसमें प्रियंका चोपड़ा लीड रोल में हैं। गंगाजल पार्ट 1 की तरह ही इस फिल्म में भी दिखाया गया है कि भ्रष्टाचार किस हद तक पैर पसारे है और कैसे एक ईमानदार पुलिस अफसर इनसे लड़ती है। पहले भाग में अजय देवगन मुख्य भूमिका में थे। ऐसी और कई फिल्में हैं जो सरकार को आईना दिखाती हैं और देखने लायक हैं।
सत्ता और प्रशासन की हकीकत बयां करती हैं ये 10 फिल्में
2013 में रिलीज हुई सत्याग्रह की कहानी दर्शाती है कि कैसे सरकार एक आदमी की मौत पर उसके परिवार को मुआवजा देने के लिए बार-बार टरकाती रहती है। उस आदमी का दोस्त और उसका पिता उसके हक के लिए लड़ता है। बूढ़ा पिता सरकार के खिलाफ अनशन भी करता है। फिल्म दिखाती है कि आम जनता सरकार के वायदों में कैसे उलझ कर रह जाती है। फिल्म में अमिताभ बच्चन,अजय देवगन, करीना कपूर हैं।
सत्ता और प्रशासन की हकीकत बयां करती हैं ये 10 फिल्में
फिल्म यंगिस्तान असल में एक ऐसे आदमी की लव स्टोरी है जिसके पिता प्रधानमंत्री होते हैं लेकिन उनकी मौत के बाद वे न चाहते हुए भी पार्टी की कमान संभालने पर मजबूर हो जाता है। इस तरह उसकी निजी जिंदगी पर भी असर पड़ता है। राजनीति के पिछड़ों से अंजान ये लड़का कैसे अपनी ईमानदारी से काम के तरीके बदलता है, ये ही फिल्म की कहानी है। 2014 में ये फिल्म रिलीज हुई थी।
सत्ता और प्रशासन की हकीकत बयां करती हैं ये 10 फिल्में
फिल्म राजनीति में दिखाया गया है कि कैसे दो परिवार गद्दी पाने की होड़ में सब ताक पर रख देते हैं। खून खराबे और षडयंत्र के बीच होती है सारी राजनीति जो इनकी निजी जिंदगियों में उथल पुथल मचा देती है। फिल्म 2010 में रिलीज हुई थी और इसमें कैटरीना कैफ, रणबीर कपूर, अजय देवगन, अर्जुन रामपाल, मनोज वाजपेयी और नाना पाटेकर मुख्य भूमिका में हैं।
सत्ता और प्रशासन की हकीकत बयां करती हैं ये 10 फिल्में
2006 में आई रंग दे बसंती उन 6 युवाओं की कहानी है जो अपने दोस्त और शहीद स्कावड्रन लीडर की मौत पर राजनीति कर रहे राजनेताओं से बदला लेने के लिए उनका खून कर देते हैं। हालांकि वे खुद भी गोलियों से भून दिए जाते हैं। लेकिन फिल्म इस बात को उजागर करती है कि क्या वाकई हमारे देश में वायु सेना के जवानों को इतने सस्ते पुर्जे वाले हवाई जहाज दिए जाते हैं जिनमें खामिया होने के कारण उनकी मौत हो जाती है।