'कभी हंसाती,कभी रुलाती', पूरी फिल्मी है बॉबी देओल की जिंदगी
बॉबी देओल आज अपना 49वां जन्मदिन मना रहे हैं। बॉबी खुद एक अभिनेता हैं, लेकिन उनकी अपनी जिंदगी भी किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं। बॉबी देओल कभी अपने चाहने वालों को हंसाते हैं, तो कभी रुला देते हैं। किसी भी आम आदमी की तरह बॉबी भी हालात से नहीं जीत पा रहे हैं।
'कभी हंसाती,कभी रुलाती', पूरी फिल्मी है बॉबी देओल की जिंदगी
बॉबी देओल मुंह में चांदी की चम्मच लेकर पैदा हुए। धर्मेंद के सितारे उस समय बुलंदियों की तरफ बढ़ रहे थे, जब नन्हें बॉबी उनके घर हुए। वो बचपन में धर्मेंद्र के बेहद चहेते थे। इसका एक नमूना तब देखना को मिला, जब 1977 में आई फिल्म 'धर्मवीर' में 10 साल के बॉबी को धर्मेंद्र के बेटे का रोल मिला। धर्मेंद्र ने बड़े बेटे सनी की जगह बॉबी को लिया। इस तरह उनका करियर शुरु हुआ।
'कभी हंसाती,कभी रुलाती', पूरी फिल्मी है बॉबी देओल की जिंदगी
इसके बाद बॉबी ने 'बरसात' से बतौर हीरो फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री मारी। किसी भी बड़े सितारे का बेटा जब फिल्मों में आता है, तो सबकी निगाहें होती हैं। बॉबी की तरफ भी सबकी निगाहें थी। 1995 में आई 'बरसात' के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट डेब्यू अवार्ज मिला। बॉबी का करियर चल निकला।
'कभी हंसाती,कभी रुलाती', पूरी फिल्मी है बॉबी देओल की जिंदगी
1997 में 'गुप्त' और 1998 में 'सोल्जर' के हिट होने के बाद बॉबी ऐसे स्टार हो गए जिसके साथ हर निर्माता काम करना चाहता था। ये वो समय था जब उनके बड़े भाई सनी देओल बड़े स्टार हुआ करते थे। सनी के एक्शन हीरो के तौर पर 90 के दशक में बड़े चर्चे थे। लेकिन शायद सनी भी नहीं जानते थे, कि उनका ही भाई उनको टक्कर देने आ रहा है।
'कभी हंसाती,कभी रुलाती', पूरी फिल्मी है बॉबी देओल की जिंदगी
पापा धर्मेंद्र और भाई सनी अपने एक्शन के लिए पहचान जाते रहे तो फिर भला बॉबी ही कहां पीछे रहने वाले थे। 'बादल'(1999) और 'बिच्छू'(2000) ने बॉबी ने एक्शन का डंका बजवा दिया। सनी देओल का करियर अब ढलान की तरफ था, ऐसे में बॉबी ने दिखा दिया कि देओल परिवार का एक्शन पर अधिकार बना रहेगा।