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know about veerappan encounter and life who earned crores through smuggling
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पढ़ें, चंदन और हाथी के दांतों की तस्करी से करोड़ों कमाने वाले वीरप्पन की जिंदगी के कई सच
Sat, 04 Feb 2017 12:39 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sat, 04 Feb 2017 12:39 PM IST
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दक्षिण भारत के जंगलों में अपने आतंक के लिए पहचाने जाने वाले वीरप्पन के एनकाउंटर से जुड़ा एक बड़ा खुलासा हुआ है। मीडिया खबरों के मुताबिक तत्कालीन एसटीएफ चीफ विजय कुमार ने अपनी किताब ने ये खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि वीरप्पन को मारने में नामी बिजनेमैन ने मदद की थी। आईए आपको बतातें हैं वीरप्पन के एनकाउंटर से लेकर उसके जीवन से जुड़ी कुछ अहम बातें....
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चंदन की लकड़ी और हाथी के दांतों की तस्करी लिए खुख्यात वीरप्पन की मौत 18 अक्टूबर 2004 को हुई थी। दक्षिण भारत के जंगलों में वीरप्पन के आतंक और दहशत ने पुलिस और आर्मी की नाक में दम कर दिया था। खूखांर होने के साथ-साथ वीरप्पन एक तेज दिमाग का शख्स था और उसे पकड़ने के लिए सेना और पुलिस को तीन साल से भी ज्यादा का समय लगा था।
ऐसा माना जाता है वीरप्पन की काली कमाई की चाह ने तस्करी की दुनिया में नया मोड़ ला दिया था और लोगों में कहीं-न-कहीं पुलिस का डर खत्म होने लगा था। आईए बताते हैं वीरप्पन से जुड़ी वो बातें जिनके लिए वीरप्पन के आतंक से थर्रारते थे लोग।
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वीरप्पन का जन्म 18 जनवरी 1952 को हुआ था और वह महज 8 साल की उम्र से ही अवैध रूप से शिकार करने वाले गिरोह में शामिल हो गया था। वीरप्पन ने इसी गिरोह में गोली चलाने से लेकर आर्मी को चकमा देना सीखा था। छोटी उम्र में ही वह सेना के जवानों के ऊपर हमला करने लगा और कई को मौत के घाट उतार दिया।
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बताया जाता है कि वीरप्पन को हाथियों का शिकार करके उनके दांतों की तस्करी करने की चाहत बचपन से ही थी। इसलिए उसने महज 12 साल की उम्र में गोली चलाकर हाथी को मार गिराया था, जबकि उसने 17 साल की उम्र में पहली बार मर्डर किया। पुलिस और सेना के शिंकजे में न आने वीरप्पन ने अपने आतंक को कायम रखने के लिए लोगों की हत्या की जिसमें अधिकतर सेना के जवान शामिल थे।
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वीरप्पन ने करीब 2,000 से ज्यादा हाथियों की हत्या की थी। इसके बाद उसने अपने प्रतिद्वंदी गिरोह का खात्मा किया और जंगल में अपनी बादशाहत कायम कर ली। बताया जाता है कि 40 साल में वीरप्पन ने हाथियों के दांत की तस्करी से 88 हजार पाउंड्स यानी करीब 75 करोड़ रुपये की काली कमाई की थी। इतना ही नहीं उसने करीब 10 हजार टन चंदन की लकड़ी का व्यापार किया था।
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