दमोह के जबेरा थाना क्षेत्र के कोरता गांव निवासी 45 वर्षीय युवक मोहन चक्रवर्ती ने जहरीला पदार्थ खा लिया। इससे उसकी मौत हो गई। परिजनों ने कुछ लोगों पर जहर पिलाने के आरोप लगाते हुए मंगलवार रात दमोह-जबलपुर हाईवे पर शव रखकर प्रदर्शन कर दिया। रहली विधायक और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव वहां से गुजर रहे थे। उन्होंने पुलिस से बात कर उचित कार्रवाई करने को कहा। परिजनों को आश्वासन दिया, तब जाकर प्रदर्शन खत्म हुआ।
शराब में मिलाया जहर
मृतक के भतीजे धीरज ने बताया कि मोहन खेत में पानी देने के लिए गया था। वहां से कुछ लोग उसे अपने साथ लेकर गए। वहां शराब में जहर मिलाकर पिलाया। उसे अस्पताल लेकर गए तो वहां उचित इलाज नहीं मिला। पुलिस बयान लेने भी नही पहुंची। जब थाने में जानकारी देने गए तो वहां कोई नहीं मिला। इसके बाद जाम लगाया गया और आरोपियों पर कार्रवाई की मांग की गई। परिजन के बताए अनुसार मृतक ने किसी से 10 हजार रुपए उधार लिए थे जिसके चलते उसे जहर पिलाया गया है।टीआई विजय अहिरवार ने बताया कि मामले में जांच जारी है। परिजन के बयान के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
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दमोह में युवक की मौत पर परिजनों ने हाईवे पर हंगामा किया।
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने समय पर नहीं लिए बयान
मृतक मोहन चक्रवर्ती के परिजनों का कहना था कि बेटे को जबेरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था। जहां पर डाक्टर ने पुलिस को सूचित किया था। इसके बाद भी पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। अस्पताल से जबलपुर रेफर किया गया। कटंगी के पास हो बेटे की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है पुलिस ने मामले को गंभीर नहीं लिया। मृतक के बयान दर्ज करने में लापरवाही की है। इसे लेकर आक्रोशित परिजन एवं चक्रवर्ती समाज के सैकड़ो लोगों ने दमोह जबलपुर स्टेट हाईवे जबेरा बाईपास पर शव रखकर चक्का जाम कर दिया। परिजनों ने एडिशनल एसपी संदीप मिश्रा का वाहन भी रोका। वे खुद ऑटो में सवार होकर जबेरा थाने तक पहुंचे।
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दमोह में युवक की मौत पर परिजनों ने हाईवे पर हंगामा किया।
- फोटो : अमर उजाला
गोपाल भार्गव जबलपुर से लौट रहे थे
जब हाईवे पर हंगामा चल रहा था, तब जबलपुर से गड़कोटा की और लौट रहे रहली विधायक और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव को भी जाम का सामना करना पड़ा। उनकी गाड़ी प्रदर्शन कर रहे लोगों ने रोकी। वह परिजनों के पास आए। उनकी बात सुनी और दमोह एसपी से फोन पर बात की। जांच करने के बाद मामले में एफआईआर दर्ज करने के लिए बोला गया। इसके बाद परिजनों के द्वारा गोपाल भार्गव की गाड़ी को जाने दिया।