कला अपने समय का आईना होती है। इसे संजोकर रखना, मतलब हम अपने आज को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित कर रहे हैं। ताकि वे जान सकें कि उनसे पहले की पीढ़ियां कितनी उन्नत और विकसित रही हैं। शायद यही सोचकर लखनऊ विश्वविद्यालय के अंतर्गत आर्ट्स कॉलेज की स्थापना की गई थी। (सभी फोटो- कुलदीप सिंह।)
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जनाब चौंकिए नहीं! ये तस्वीरें किसी भूतिया बंगले की नहीं बल्कि आर्ट्स कॉलेज की हैं
Thu, 19 Sep 2019 03:23 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 19 Sep 2019 03:23 PM IST
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आर्ट्स कॉलेज
- फोटो : अमर उजाला
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ये जो तस्वीरें आप देख रहे हैं, ज्यादा पुरानी नहीं हैं। पिछले साल आर्ट्स कॉलेज के छात्र पूर्णेश कुमार ने परिसर में बेकार पड़ी वस्तुओं से कड़ी मेहनत कर इन कृतियों को बनाया था।
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पूर्णेश कुमार ने यह सोचकर इन कलाकृतियों में जान फूंकी थी कि भविष्य में जब अन्य छात्र कॉलेज आएंगे तो वे इनसे प्रभावित होंगे।
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लेकिन स्थानीय प्रशासन की लापरवाही के चलते आज इन कलाकृतियों की दशा देखिए क्या हो गई है। कभी जीवंत सी लगने वाली ये तस्वीरें मानो कह रही हों-
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वक्त की गर्दिश में ‘सहज’ खो गए हम तो
कई मौसम, कई तूफां भी सह गए हम तो
बिखरे बिखरे से टुकड़ों को जब मिलाओगे
तब कहीं जाकर मेरी तस्वीर ढूंढ पाओगे। (आगे देखें और तस्वीरें)
कई मौसम, कई तूफां भी सह गए हम तो
बिखरे बिखरे से टुकड़ों को जब मिलाओगे
तब कहीं जाकर मेरी तस्वीर ढूंढ पाओगे। (आगे देखें और तस्वीरें)