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लखनऊ यूनिवर्सिटीः मेडल लिस्ट में छाईं बेटियां, बोलीं...
Fri, 27 Nov 2020 05:17 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 27 Nov 2020 05:17 PM IST
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सरिता, अनम खान, हर्षिता दुबे, जया कुमारी
- फोटो : अमर उजाला
लखनऊ विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में दिए जाने वाले मेडल में एक बार फिर बेटियों ने बाजी मारी है। विवि की ओर से गुरुवार को जारी विस्तृत मेडल लिस्ट में सर्वाधिक मेडल बेटियों ने झटके हैं। चांसलर सिल्वर मेडल पाने वाली एमएससी मैथ की छात्रा हर्षिता दुबे को 12 मेडल मिले हैं। हर्षिता के अलावा एमए एआईएच की सरिता यादव व एलएलबी की प्रगति श्रीवास्तव को आठ-आठ मेडल मिले हैं।हर्षिता को मिलने वाले मेडल में डॉ. एएन सिंह गोल्ड मेडल, इकबाल नारायण श्रीवास्तव गोल्ड मेडल, माधुरी देवी मेमोरियल गोल्ड मेडल शामिल हैं। इसके साथ ही सरिता यादव एमए एआईएच को श्रीनिवासन वरदा चेयर गोल्ड मेडल, त्रिलोकी नाथ गुरतु मेमोरियल गोल्ड मेडल समेत आठ मेडल मिले हैं। प्रगति श्रीवास्तव एलएलबी को बाबू महावीर प्रसाद श्रीवास्तव मेमोरियल गोल्ड मेडल, द्वारिका प्रसाद निगम गोल्ड मेडल समेत आठ मेडल मिले हैं।
लखनऊ यूनिवर्सिटी
- फोटो : अमर उजाला
इसी क्रम में जया कुमारी एमएससी फिजिक्स, अनम खान एमए सोशल वर्क व प्रियांशी राज एमए इकोनॉमिक्स को छह-छह, बीए की शांभवी पांडेय, एमएससी की शांभवी द्विवेदी, एमए हिस्ट्री की अदिति सिंह व एमपीए के मयंक कुमार को चार-चार मेडल मिले हैं। परीक्षा नियंत्रक प्रो. एएन सक्सेना ने बताया कि पूर्व में मेडल की अस्थयी सूची जारी की गई थी। अब विस्तृत सूची विवि की वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है। विद्यार्थी इस पर सात दिसंबर तक आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
हर्षिता दुबे
- फोटो : अमर उजाला
आईएएस बनकर करूंगी सेवा
मुझे लोगों की सेवा करनी है। इसके लिए मैं आईएएस बनना चाहती हूं। खासकर गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए काम करना है। आज के समय में शिक्षा काफी महत्वपूर्ण है। पिता शैलेंद्र दुबे अधिवक्ता व मां साधना दुबे गृहिणी हैं। मैं उनके सपने को साकार करूंगी। - हर्षिता दुबे
मुझे लोगों की सेवा करनी है। इसके लिए मैं आईएएस बनना चाहती हूं। खासकर गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए काम करना है। आज के समय में शिक्षा काफी महत्वपूर्ण है। पिता शैलेंद्र दुबे अधिवक्ता व मां साधना दुबे गृहिणी हैं। मैं उनके सपने को साकार करूंगी। - हर्षिता दुबे
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सरिता यादव
- फोटो : अमर उजाला
प्रोफेसर बनकर करूंगी शिक्षित
मैं प्रोफेसर बनकर लोगों को शिक्षित करना चाहती हूं। पिता राकेश यादव बाराबंकी में खेती करते हैं। मां शारदा देवी गृहिणी हैं। उन्होंने दिक्कत सहकर भी मुझे पढ़ाया है। मैं उनकी सेवा करना चाहती हूं। ग्रामीण क्षेत्र में सुविधाओं के लिए भी काम करना चाहती हूं। - सरिता यादव
मैं प्रोफेसर बनकर लोगों को शिक्षित करना चाहती हूं। पिता राकेश यादव बाराबंकी में खेती करते हैं। मां शारदा देवी गृहिणी हैं। उन्होंने दिक्कत सहकर भी मुझे पढ़ाया है। मैं उनकी सेवा करना चाहती हूं। ग्रामीण क्षेत्र में सुविधाओं के लिए भी काम करना चाहती हूं। - सरिता यादव
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अनम खान
- फोटो : अमर उजाला
अल्पसंख्यकों की शिक्षा के लिए काम करूंगी
मैं समाज सेवा के माध्यम से खासकर अल्पसंख्यकों की शिक्षा के लिए काम करना चाहती हूं। ग्रामीण क्षेत्र में अभी स्वास्थ्य के मुद्दों को लेकर बहुत जागरूकता नहीं है। उसके लिए भी काम करना है। पिता सलमान खालिद आईटी जॉब करते हैं। मां निखत फातिमा गृहिणी हैं। - अनम खान
मैं समाज सेवा के माध्यम से खासकर अल्पसंख्यकों की शिक्षा के लिए काम करना चाहती हूं। ग्रामीण क्षेत्र में अभी स्वास्थ्य के मुद्दों को लेकर बहुत जागरूकता नहीं है। उसके लिए भी काम करना है। पिता सलमान खालिद आईटी जॉब करते हैं। मां निखत फातिमा गृहिणी हैं। - अनम खान