तीर्थ नगरी पुरी में गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू हो गई है। यह यात्रा धार्मिक रूप से बहुत ही महत्वपूर्ण है। इस रथ यात्रा में भाग लेने के लिए दुनियाभर से श्रद्धालु पुरी में जुटते हैं। रथ यात्रा के लिए तीन विशाल रथ तैयार किए जाते हैं। इन रथों को बनाने की प्रक्रिया बसंत पंचमी से शुरू हो जाती है। अगर आप भी रथ यात्रा में शामिल होने को सोच रहे हैं तो हम आपको इस धार्मिक यात्रा से जुड़े रिवाज और पुरी पहुंचने के रूट संबंधी जानकारी दे रहे हैं।
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में होना चाहते हैं शामिल तो यहां है पूरे कार्यक्रम की जानकारी
रथ यात्रा का पहला दिन
भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा 4 जुलाई से शुरू हो गई है। पहले दिन भगवान जगन्नाथ को रथ यात्रा पर सवार किया जाता है और भगवान जगन्नाथ अपनी यात्रा लेकर मौसी के घर के लिए निकलते हैं। भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर गुंडिचा देवी का मंदिर है। भगवान जगन्नथा हर साल एक सप्ताह के लिए मौसी के घर जाते हैं। इस दिन यात्रा की तैयारी सुबह से ही शुरू हो जाती है और दिनभर कई रीति-रिवाज को पूरा करने के बाद रथ खींचने का पावन काम शुरू होता है।
हेरा पंचमी 8 जुलाई
मां लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ की पत्नी हैं। हेरा पंचमी का दिन मां लक्ष्मी को समर्पित है। जब भगवान जगन्नाथ अपने निवास स्थान पर नहीं लौटते हैं तो मां लक्ष्मी परेशान हो जाती हैं और गुंडिटा मंदिर जाकर भगवान जगन्नाथ से मुलाकात करती हैं। इस दौरान मंदिर से मां लक्ष्मी पालकी में विराजमान होकर निकलती है।
बहुदा यात्रा 12 जुलाई
इस खास दिन पर भगवान जगन्नाथ मौसी के घर से लौटकर अपने निवास स्थान लौटते हैं। इस दिन यह यात्रा शाम को 4 बजे ही शुरू होती है। इसके अलावा 13 जुलाई सुना बेशा होता है। इस खास मौके पर भगवान के विग्रह का नया श्रृंगार किया जाता है। इस पर्व की शुरुआत राजा कपिलेंद्र देब के शासन काल के दौरान 1430 ईस्वी में की गई थी।
नीलीद्रि बिजया 15 जुलाई
इस दिन भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन और पत्नी के विग्रह को वापस मंदिर के अंदर विराजमान किया जाएगा। इससे पहले जो भी रस्म निभाए जाते हैं वह जगन्नाथ मंदिर के गर्भ ग्रह से बाहर ही निभाएं जाएंगे। ये सभी पांच खास कार्यक्रम हैं, जो रथ यात्रा के दौरान पुरी में आयोजित किए जाते हैं। अगर आप पुरी आने की सोच रहे हैं तो कम से कम 15 दिन का कार्यक्रम बनाकर आएं और पुरी के आस-पास के दर्शनीय स्थलों का सैर करें।