मां की लोरी से बच्चे को प्यार ही नहीं एनर्जी भी मिलती है, जाने कैसे
सुरक्षा का अहसास
अलग-अलग हुए अध्ययनों की थ्योरी को समझें, तो संगीत यानी म्यूजिक हमारे मस्तिष्क के कई हिस्सों को एक साथ उत्तेजित करता है, जिसे मेडिकल की भाषा में 'म्यूजिकल लर्निंग' कहते हैं। यानी जब बच्चा लोरी सुन रहा होता है, तब उसका असर उसके दिमाग के दो हिस्सों पर होता है। एक हिस्सा वह है, जो ध्वनियां सुनता और उनका विश्लेषण करता है।
दूसरा हिस्सा वह है, जिस पर संगीत का भावनात्मक असर होता है। इसलिए बच्चा जब भी अपनी मां की आवाज सुनता है, तो वह खुश हो जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि संगीत की भावनात्मक प्रतिक्रिया, बच्चों को कहानी सुनाने से ज्यादा प्रभावशाली होती है। इससे बच्चों में आराम और सुरक्षा का अहसास होता है।
लोरी गाना या सुनाना केवल शिशु के लिए ही नही, मां के लिए भी बेहद फायदेमंद होता है। यूएस के मियामी फ्रोस्ट स्कूल ऑफ म्यूजिक के शोध के मुताबिक, लोरी गाने से मां के अंदर मातृत्व भावना सशक्त होती है। इससे मां में मौजूद सभी नकारातमक भाव भी दूर होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, डिलीवरी के बाद ज्यादातर महिलाएं डिप्रेशन में रहती हैं। ऐसे में लोरी गाना उन्हें डिप्रेशन से बाहर निकालने में मदद करता है।
जर्नल ऑफ म्यूजिक थैरेपी के एक शोध के मुताबिक, दुनियाभर में मांएं शिशु के लिए लोरी गाते समय एक ही लय और सुर का इस्तेमाल करती हैं। शिशु को खुश देखकर मां के भीतर मातृत्व की भावना सशक्त होती है और तनाव भी कम होता है। एक अन्य रिसर्च के मुताबिक, जब मां अपने शिशु का लोरी सुनाती है, तो उस समय ज्यादा अलर्ट रहती है।
मनोचिकित्सक, डॉ. हर्षित गर्ग कहते हैं कि देखा गया है कि जिन बच्चों को बचपन में किसी कारणवश लोरी नहीं सुनाई जाती, उन बच्चों में सामान्य बच्चों की तुलना में रिश्तों को समझने, अपनी बात रखने, मानसिक और शारीरिक विकास में देरी होने जैसी समस्याएं आती हैं। कहने का मतलब यह है कि लोरी भावनात्मक विकास के लिए भी जरूरी है।