जरूरत से ज्यादा सख्ती बच्चों की मासूमियत और सहजता को कम कर सकती है। उनकी क्यूटनेस उनके स्वाभाविक व्यवहार में होती है, लेकिन जब उन पर अनावश्यक पाबंदियां लगाई जाती हैं, तो वे डरने लगते हैं, झिझकने लगते हैं और अपनी चंचलता खो सकते हैं। अनुशासन आवश्यक है, लेकिन इसे प्यार और समझदारी के साथ अपनाना चाहिए। सही मार्गदर्शन मिलने से बच्चे न केवल अनुशासित बनते हैं, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी मजबूत बना रहता है। तो आज की इस खबर में हम आपको कुछ पेरेंटिंग टिप्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे अपने बच्चे को सही मार्गदर्शन दे सकता है। आइए जानते हैं।
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Parenting Tips: कहीं आपकी सख्ती का बच्चों पर पड़ तो नहीं रहा बुरा असर? परवरिश में जरूर रखें इन बातों का ध्यान
Thu, 20 Feb 2025 09:54 AM IST
दीक्षा पाठक
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीक्षा पाठक
Updated Thu, 20 Feb 2025 09:54 AM IST
सार
Effects of Strict Parenting: सही मार्गदर्शन मिलने से बच्चे न केवल अनुशासित बनते हैं, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी मजबूत बना रहता है। तो आज की इस खबर में हम आपको कुछ पेरेंटिंग टिप्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे अपने बच्चे को सही मार्गदर्शन दे सकता है। आइए जानते हैं।
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कहीं आपकी सख्ती का बच्चों पर पड़ तो नहीं रहा बुरा असर?
- फोटो : freepik
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कहीं आपकी सख्ती का बच्चों पर पड़ तो नहीं रहा बुरा असर?
- फोटो : freepik
1. सख्ती के बजाय बातचीत करें
बच्चों को डांटने या आदेश देने के बजाय उनसे खुलकर बातचीत करें। उन्हें यह समझाने की कोशिश करें कि कौन-सा व्यवहार सही है और क्यों।
2. नियमों को कठोर नहीं, आसान बनाएं
अनावश्यक सख्त नियम बनाने के बजाय, बच्चों को यह बताएं कि नियम उनके भले के लिए हैं। नियम तार्किक और व्यवहारिक होने चाहिए, ताकि बच्चे उन्हें आसानी से समझ सकें।
3. धैर्य और प्यार से पेश आएं
बच्चे गलतियाँ करेंगे, लेकिन उन्हें सख्ती से सुधारने के बजाय धैर्यपूर्वक सही राह दिखाएं। प्यार से समझाने पर वे ज्यादा जल्दी और प्रभावी तरीके से सीखते हैं।
बच्चों को डांटने या आदेश देने के बजाय उनसे खुलकर बातचीत करें। उन्हें यह समझाने की कोशिश करें कि कौन-सा व्यवहार सही है और क्यों।
2. नियमों को कठोर नहीं, आसान बनाएं
अनावश्यक सख्त नियम बनाने के बजाय, बच्चों को यह बताएं कि नियम उनके भले के लिए हैं। नियम तार्किक और व्यवहारिक होने चाहिए, ताकि बच्चे उन्हें आसानी से समझ सकें।
3. धैर्य और प्यार से पेश आएं
बच्चे गलतियाँ करेंगे, लेकिन उन्हें सख्ती से सुधारने के बजाय धैर्यपूर्वक सही राह दिखाएं। प्यार से समझाने पर वे ज्यादा जल्दी और प्रभावी तरीके से सीखते हैं।
कहीं आपकी सख्ती का बच्चों पर पड़ तो नहीं रहा बुरा असर?
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4. उनकी भावनाओं को समझें
अगर बच्चा किसी बात से नाराज या उदास होता है, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय उसकी भावनाओं को समझने का प्रयास करें। ऐसा करने से बच्चे को सुरक्षा और अपनापन महसूस होता है।
5. सकारात्मक अनुशासन अपनाएं
डांटने या दंड देने की बजाय, अच्छे व्यवहार को प्रोत्साहित करें। जब बच्चा कुछ अच्छा करे, तो उसकी सराहना करें ताकि वह अच्छा करने के लिए प्रेरित हो।
6. आदेश देने की बजाय विकल्प दें
बच्चों को सीधा आदेश देने के बजाय उन्हें विकल्प दें, ताकि वे खुद निर्णय लेना सीखें। जैसे, "अभी होमवर्क करना चाहते हो या 10 मिनट बाद?" इससे वे अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभाना सीखेंगे।
अगर बच्चा किसी बात से नाराज या उदास होता है, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय उसकी भावनाओं को समझने का प्रयास करें। ऐसा करने से बच्चे को सुरक्षा और अपनापन महसूस होता है।
5. सकारात्मक अनुशासन अपनाएं
डांटने या दंड देने की बजाय, अच्छे व्यवहार को प्रोत्साहित करें। जब बच्चा कुछ अच्छा करे, तो उसकी सराहना करें ताकि वह अच्छा करने के लिए प्रेरित हो।
6. आदेश देने की बजाय विकल्प दें
बच्चों को सीधा आदेश देने के बजाय उन्हें विकल्प दें, ताकि वे खुद निर्णय लेना सीखें। जैसे, "अभी होमवर्क करना चाहते हो या 10 मिनट बाद?" इससे वे अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभाना सीखेंगे।
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7. खुद आदर्श बनें
बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने माता-पिता को करते देखते हैं। यदि आप धैर्य, सम्मान और समझदारी दिखाएंगे, तो वे भी वैसा ही व्यवहार अपनाएंगे।
8. आत्मविश्वास बढ़ाने पर ध्यान दें
बच्चों को अपनी बात कहने और खुद निर्णय लेने का अवसर दें। इससे वे आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनेंगे, जो उनके व्यक्तित्व के लिए बेहद जरूरी है।
बच्चे वही सीखते हैं जो वे अपने माता-पिता को करते देखते हैं। यदि आप धैर्य, सम्मान और समझदारी दिखाएंगे, तो वे भी वैसा ही व्यवहार अपनाएंगे।
8. आत्मविश्वास बढ़ाने पर ध्यान दें
बच्चों को अपनी बात कहने और खुद निर्णय लेने का अवसर दें। इससे वे आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनेंगे, जो उनके व्यक्तित्व के लिए बेहद जरूरी है।
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- फोटो : Pexel
9. जरूरत हो तभी ‘ना’ कहें
हर छोटी बात पर ‘ना’ कहने से बच्चे जिद्दी बन सकते हैं। इसलिए जहां जरूरी हो, वहीं मना करें और बाकी बातों में लचीलापन अपनाएं।
10. सजा देने की बजाय समाधान निकालें
अगर बच्चा गलती करता है, तो उसे सजा देने के बजाय उसकी गलती को सुधारने में मदद करें। मिलकर समाधान खोजने से बच्चा अधिक जिम्मेदार बनता है।
हर छोटी बात पर ‘ना’ कहने से बच्चे जिद्दी बन सकते हैं। इसलिए जहां जरूरी हो, वहीं मना करें और बाकी बातों में लचीलापन अपनाएं।
10. सजा देने की बजाय समाधान निकालें
अगर बच्चा गलती करता है, तो उसे सजा देने के बजाय उसकी गलती को सुधारने में मदद करें। मिलकर समाधान खोजने से बच्चा अधिक जिम्मेदार बनता है।