2 अप्रैल से 10 अप्रैल 2022 तक नवरात्रि है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, नवरात्रि के पावन दिनों पर माता दुर्गा धरती पर आती हैं और जो भक्त उनका स्वागत करते हैं, उनके घर पर नौ दिनों के लिए वास करती हैं। इन दिनों को काफी शुभ माना जाता है, जिसमें हर तरह के शुभ कामों की शुरुआत की जाती है। लोग नवरात्रि में भूमि पूजन, गृह प्रवेश, मुंडन और खास पूजा प्रतिष्ठान का आयोजन करते हैं। हालांकि नवरात्रि में सभी तरह के शुभ काम होते हैं लेकिन विवाह नहीं किए जाते हैं। माता के आशीर्वाद से किसी नए काम का श्रीगणेश कर सकते हैं लेकिन नवरात्रि में शादी के बंधन में नहीं बंध सकते हैं। सवाल है कि शुभ कार्यों के लिए नवरात्रि उत्तम समय है पर शादी के लिए क्यों नहीं? नवरात्रि में शादी के अलावा कुछ और काम भी वर्जित होते हैं। चलिए जानते हैं नवरात्रि में शादी क्यों नहीं की जाती है और क्या काम नवरात्रि के दिनों में नहीं करने चाहिए।
Navratri 2022: नवरात्रि में सभी तरह के शुभ कार्य किए जाते हैं फिर शादी क्यों नहीं? जानिए कारण
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नवरात्रि में शादी न करने की वजह
नौदुर्गा की पूजा के पावन नौ दिनों में शादी न करने की धार्मिक वजह है। नवरात्रि में माता भक्तों के घर पर वास करती हैं, इस दौरान लोग व्रत रखते हैं और मानसिक व शारीरिक शुद्धता को अपनाते हैं। शादी का मुख्य उद्देश्य वंश को आगे चलाने के लिए संतान को जन्म देना है। वहीं धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, नवरात्रि में स्त्री के साथ सहवास नहीं करना चाहिए। बहुत पवित्र दिन होने के कारण नवरात्रि में शादी नहीं की जानी चाहिए।
नवरात्रि में क्या करना है वर्जित
शादी के अलावा कुछ और भी बातें हैं तो शादी में वर्जित मानी जाती हैं। विष्णु पुराण के मुताबिक, नवरात्रि का व्रत रखने वाले भक्त को दिन में सोना नहीं चाहिए। माना जाता है कि दिन में सोने से उपवास का फल नहीं मिलता।
मादक पदार्थों का सेवन वर्जित
नवरात्रि के दिन बहुत पवित्र माने जाते हैं। इन दिनों में लोग उपवास रखते हैं। लेकिन अगर आप उपवास नहीं भी हैं तब भी कुछ चीजें आपके लिए वर्जित होती हैं। जैसे नवरात्रि में शराब, तंबाकू आदि नशे की चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
सात्विक भोजन
वैसे तो नवरात्रि में उपवास के दौरान लोग फलाहार करते हैं लेकिन अगर आप उपवास न भी हों तब भी सात्विक भोजन का ही सेवन करें। मांस मदिरा, लहसुन -प्याज आदि का सेवन करने से परहेज करें। नवरात्रि के नौ दिनों तक ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।