साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा दिए एक फैसले के मुताबिक आईपीसी के सेक्शन 497 के तहत किसी भी महिला को विवाहोत्तर सबंधों के लिए दोषी करार नहीं कर सकता। यहां तक की कानून किसी महिला को ऐसे सबंधों के लिए उकसाने के नाम पर भी दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
महिला दिवस विशेष: महिलाएं बिना थाने जाए ईमेल से भी दर्ज करा सकती हैं शिकायत
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पुलिस किसी भी महिला को सूरज उगने से पहले या सूरज ढलने के बाद हिरासत में नहीं ले सकती। इसके लिए उसके पास लिखित में पर्याप्त कारणों के साथ सबूत होना चाहिए।
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दिल्ली पुलिस एक महिला को ये छूट देती है कि वो घटनास्थल के अलावा किसी भी थाने में अपनी एफआईआर दर्ज करा सकती है और इसे करने से कोई भी थाना इंकार नहीं कर सकता।
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कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर के सेक्शन 51 के तहत हिरासत में ली गई महिला की जांच या फिर उसे गिरफ्तार करने का अधिकार सिर्फ महिला पुलिस को है। कोई पुरुष उससे गिरफ्तार नहीं कर सकता।
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दिल्ली पुलिस ने महिलाओं को ये अधिकार दिया है कि वो अपनी शिकायत को बिना सामने आए ईमेल या फिर रजिस्टर्ड पोस्ट से भी दर्ज करा सकती है जिसे बाद में संबंधित थानेदार उसे घटना से संबंधित थाने के पास पुष्टि के लिए भेज सकता है और एफआईआर दर्ज करता है।