7 मई से 6 जून तक चलने वाले रमजान के पाक महीनें में मुस्लिम समुदाय के ज्यादातर लोग रोजा रखते हैं। 30 दिन तक चलने वाले रोजों के बाद ईद का त्योहार मनाया जाता है। जिसे ईद-उल-फितर या मीठी ईद भी कहा जाता है। आज हम आपको रमजान से जुड़े ऐसे 5 झूठ के बारे में बताते हैं, जिन्हें बहुत सारे लोग सच समझते रहते हैं।
Ramadan 2019: रमजान से जुड़े ऐसे 5 झूठ जो बहुत सारे लोगों को लगते हैं सच, आप नहीं जानना चाहेंगे...
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रमजान के महीने ब्रश नहीं करना चाहिए
कई लोगों कहते हैं कि रमजान के महीने में दांतों को साफ या कुल्ला नहीं करना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है। दरअसल नमाज अदा करने वालों के लिए इस्लाम में 'मिसवाक' (दातून) से दांतों को साफ करना जरूरी माना गया है।
हर किसी के लिए रोजे जरूरी
ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि हर मुस्लिम के लिए रोजे रखना जरूरी है। बता दें, प्रेग्नेंट महिलाएं, बुजुर्ग, बीमार लोग और लंबा सफर कर रहे लोगों के लिए रोजा रखना जरूरी नहीं है। इसका मतलब यह है कि अगर कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से खुद को कमजोर महसूस करता है तो वह रोजे छोड़ सकता है।
रोजेदार के सामने खाना नहीं खाना चाहिए
रोजे के दौरान लोग कुछ नहीं खाते। इसलिए लोगों का मानना है कि रोजेदारों के सामने कुछ नहीं खाना चाहिए जबकि इस्लाम के मुताबिक रमजान के महीने को खुद पर संयम रखने का महीना माना जाता है।
पीरियड्स होने पर रोजे टूट जाते हैं
रमजान के महीने में कहा जाता है कि अगर कोई महिला पीरियड्स से होती है तो उसके रोजे खराब हो जाते हैं, लेकिन ऐसा नहीं होता है। पीरियड्स से होने वाली महिला अगर इस दौरान अपना कोई रोजा छोड़ती है तो उसे ईद के बाद पूरा कर सकती है।