मस्तिष्क हमारे पूरे शरीर को नियंत्रित करता है। शरीर में सभी कार्यों के संचालन, भावनात्मक नियंत्रण के साथ किस अंग को कब क्या कार्य करना है, ये सभी मस्तिष्क द्वारा ही संचालित किया जाता है। मसलन, मस्तिष्क को शरीर का सेंट्रल कंप्यूटर कहा जा सकता है और शरीर ठीक तरीके से काम करता रहे इसके लिए जरूरी है कि आपका मस्तिष्क स्वस्थ रहे।
World Brain Day 2024: 'मस्तिष्क के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा पिछले चार साल का समय', कई दशकों तक रह सकता है असर
कोरोना और मस्तिष्क की समस्याएं
न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य विषयों पर सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने और मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के बारे में लोगों को शिक्षित करने के उद्देश्य से हर साल 22 जुलाई को विश्व मस्तिष्क दिवस मनाया जाता है। आइए समझते हैं कि कोरोना संक्रमण ने किस प्रकार से मस्तिष्क को क्षति पहुंचाई है और जो लोग इससे ठीक हो चुके हैं उनमें किस तरह की समस्याओं का खतरा हो सकता है?
टाइम मैगजीन में प्रकाशित एक रिपोर्ट में विशेषज्ञ कहते हैं, पिछले चार वर्ष, विशेषतौर पर कोरोना महामारी के बाद का समय मानव मस्तिष्क के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण रहा है। कोविड-19 के कारण मस्तिष्क-तंत्रिकाओं को जो क्षति हुई है उसका असर आने वाले कई दशकों तक बना रह सकता है।
कई तरह की मस्तिष्क विकारों का खतरा
कोविड-19 और इसके कारण मस्तिष्क को होने वाली समस्याओं को लेकर किए गए अध्ययन में पाया गया कि कोविड-19 हमारे मस्तिष्क में दीर्घकालिक परिवर्तनों का कारण बन गया है। कई लोगों में संक्रमण से ठीक होने के बाद लंबे समय तक ब्रेन फॉग, मानसिक थकान और स्मृति हानि जैसी संज्ञानात्मक समस्याएं बनी हुई हैं। इसके अलावा ये तंत्रिका संबंधी और मानसिक-स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को भी बढ़ाता देखा गया है।
वैंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में ब्रेन डिसफंक्शन विशेषज्ञ डॉ. वेस एली के मुताबिक कोरोना वायरस ने कई लोगों के मस्तिष्क में रक्त वाहिकाओं और सहायक कोशिकाओं को क्षति पहुंचाई है जिससे दीर्घकालिक मस्तिष्क विकारों का जोखिम बढ़ गया है।
युवा भी देखे जा रहे हैं शिकार
अध्ययनों से पता चलता है कि फ्लू जैसे श्वसन संक्रमण भी संज्ञानात्मक समस्याओं या डिमेंशिया का जोखिम पैदा कर सकते हैं। हालांकि, इन शोध ने लोगों का उतना ध्यान आकर्षित नहीं किया है जितना कि कोविड-19 ने किया है। उम्र भी संज्ञानात्मक समस्याओं के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक। 30 और 40 की उम्र के लोग भी कोविड-19 के बाद न्यूरोकॉग्निटिव समस्याओं और मानसिक स्वास्थ्य विकारों का सामना कर रहे हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं भले ही महामारी की रफ्तर अब काफी नियंत्रित है पर इसके कारण जो क्षति हुई है उसने चुनौतियां काफी बढ़ा दी हैं। जिन लोगों में कोरोना के बाद मस्तिष्क विकारों का निदान हुआ है उन्हें निरंतर उपचार प्राप्त करते रहना जरूरी है।
कोरोना वायरस से संक्रमितों में इंसेफेलाइटिस (दिमाग में सूजन) और इसके कारण भ्रम, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और याददाश्त की समस्याओं का जोखिम देखा जा रहा है। इसके अलावा कुछ लोगों में ये गंभीर अवसाद या चिंता जैसे मनोवैज्ञानिक विकारों को भी ट्रिगर करते पाया गया। इन समस्याओं का असर लंबे समय तक स्वास्थ्य पर बना रह सकता है।
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स्रोत और संदर्भ
COVID-19 Is Linked to Detectable Brain Changes
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