एक्वार्ड इम्यून डेफिशियेंसी सिंड्रोम (एड्स) गंभीर बीमारी है जिसका जोखिम वैश्विक स्तर पर बढ़ता हुआ देखा गया है। असुरक्षित यौन संबंध, दूषित इंजेक्शन और संक्रमित व्यक्ति का खून चढ़ाने के कारण एचआईवी का संक्रमण हो सकता है। ह्यूमन इम्यूनो डेफिशियेंसी वायरस (एचआईवी) का संक्रमण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देती है जिसके कारण गंभीर बीमारियों का जोखिम रहता है।
World Aids Day 2023: क्या मिल गया है एचआईवी संक्रमण का इलाज? अब तक तीन रोगियों के ठीक होने से जगी उम्मीद
अब तक तीन रोगी हो चुके हैं ठीक
एचआईवी के इलाज के लिए किए गए प्रयास में अब तक कुछ हद तक सफलता मिलती हुई दिख रही है, हालांकि वैश्विक स्तर पर इसे अब भी लाइलाज बीमारी के तौर पर ही देखा जा रहा है। अब तक एचआईवी से ठीक होने के तीन मामले सामने आए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक इसी साल एचआईवी संक्रमित एक महिला का इस रोग से सफल इलाज किया गया है। इस संक्रमण के उपचार के लिए स्टेम सेल ट्रांसप्लांट तकनीक को प्रयोग में लाया गया, जिसके माध्यम से संक्रमण को ठीक करने में सफलता मिली थी। एचआईवी से ठीक होने वाली ये पहली महिला और तीसरी व्यक्ति बन गई है।
स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के जरिए किया गया इलाज
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि एचआईवी संक्रमित महिला पहले से ल्यूकेमिया से भी पीड़ित थी। इसके इलाज के लिए एक ऐसा डोनर ढूंढा गया जिसके अंदर एचआईवी वायरस के खिलाफ कुदरती प्रतिरोधक क्षमता थी। ट्रांसप्लांट के माध्यम से एचआईवी संक्रमण को ठीक करने की दिशा में नई उम्मीद मिली है।
कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सैन फ्रांसिस्को में एड्स विशेषज्ञ स्टीवन डीक्स ने एक संबोधन में बताया कि परीक्षण के दौरान रोगी में पहले कैंसर इम्यून सेल्स को मारने के लिए कीमोथेरेपी की जरूरत पड़ी। इस प्रक्रिया के बाद उसमें कॉर्ड स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया गया। वैज्ञानिकों का मानना है कि अब महिला में एचआईवी वायरस के खिलाफ प्रतिरोधी प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित हो जाएगी।
एचआईवी संक्रमण के उपचार की जगी उम्मीद
इस इलाज प्रक्रिया के माध्यम से विशेषज्ञों को उम्मीद जगी है कि भविष्य में ये एचआईवी संक्रमण को ठीक करने में मददगार हो सकती है। हैप्लो-कॉर्ड ट्रांसप्लांट के रूप में जानी जाने वाली प्रक्रिया में, इस महिला को आंशिक रूप से मेल खाने वाले डोनर से कॉर्ड ब्लड दिया गया। इसके आधार पर अब एचआईवी के इलाज को लेकर उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं।
अभी तक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट या बोन मैरो ट्रांसप्लांट का उपयोग कुछ प्रकार के कैंसर के इलाज के लिए किया जाता रहा है।
क्या कहते हैं वैज्ञानिक?
वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि अगर ये तकनीक सफल रहती है तो एड्स लाइलाज रोग नहीं रह जाएगा। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर यवोन ब्रायसन कहते हैं, गर्भनाल रक्त कोशिकाओं का उपयोग एचआईवी के साथ जी रहे लोगों के लिए उम्मीद बढ़ाता हैं। हम प्रयास में है कि इस गंभीर रोग का सफल इलाज किया जा सके। अब भी हर साल लाखों लोगों की मौत कैंसर के कारण हो जाती है।
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स्रोत और संदर्भ:
Woman potentially cured of HIV using transplant with cord blood stem cells
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