मोनिका अग्रवाल
‘एक बार काम खत्म हो जाए, तभी आराम करूंगी।’ अधिकतर महिलाएं यही सोचकर काम में लगी रहती हैं। लेकिन ऐसा करना आपकी बड़ी गलती हो सकती है। नॉन स्टॉप घर और ऑफिस का काम करना आपको बीमार बना सकता है। इससे तनाव और अवसाद, दोनों बढ़ते हैं। अगर आप इन परेशानियों से बचना चाहती हैं तो ‘माइक्रो ब्रेक’ जरूर लें। माइक्रो ब्रेक छोटे ब्रेक हैं, जो आपको फिर से काम करने के लिए रिचार्ज करते हैं। इससे आपकी कार्यक्षमता और फोकस, दोनों बढ़ते हैं।
क्या है माइक्रो ब्रेक
माइक्रो ब्रेक वो छोटे-छोटे ब्रेक हैं, जो आपको फिर से काम करने के लिए रिचार्ज करते हैं। यह केवल एक से पांच मिनट का ही होता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि लंबे ब्रेक या वीकएंड के आराम से कहीं ज्यादा फायदेमंद माइक्रो ब्रेक होते हैं। इससे आप फिजिकली और मेंटली रिलेक्स हो पाती हैं। ये माइक्रो ब्रेक आप पर तुरंत असर करते हैं और आपको आराम पहुंचाते हैं।
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बढ़ता है फोकस
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बढ़ता है फोकस
जर्नल ऑन प्रोफेशनल डेवलपमेंट के अनुसार, माइक्रो ब्रेक लेने से फोकस और कार्यक्षमता, दोनों बढ़ते हैं। असल में, जब आप लंबे समय तक बिना ब्रेक के काम करती हैं तो आपका दिमाग थक जाता है, जिस वजह से फोकस करना मुश्किल हो जाता है। इसलिए ब्रेक लें, मनपसंद संगीत सुनें और अपने दोस्तों या साथियों से बात करें।
कम होती टेंशन
महिलाएं हर काम समय पर पूरा करने का दबाव लेकर चलती हैं। यह तनाव और दबाव, दोनों ही आपको अवसाद में डाल सकते हैं, जिसका अधिकांश महिलाओं को अंदाजा ही नहीं होता। ऐसे में बस पांच मिनट का ब्रेक आपके तनाव के स्तर को कम कर सकता है।
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बनें क्रिएटिव
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बनें क्रिएटिव
जब आप लगातार काम करते हुए थक जाती हैं तो इससे आपकी क्रिएटिविटी पर भी असर पड़ता है। ऐसे में कुछ नया सोचना मुश्किल हो जाता है। माइक्रो ब्रेक आपके दिमाग को नए विचारों के लिए खोलता है। इस दौरान आप ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें। इसमें हल्की स्ट्रेचिंग भी फायदेमंद रहेगी।
एनर्जी लेवल
लंबे समय तक लगातार काम करने से एनर्जी लेवल लो हो जाता है। अगर आप दफ्तर में लॉन्ग सिटिंग जॉब करती हैं या घर के कामों में लगी रहती हैं, तो माइक्रो ब्रेक आपको मूवमेंट करने का मौका देता है। इससे आपका दिल स्वस्थ रहता है और मधुमेह जैसी बीमारियां भी दूर रहती हैं।
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60 मिनट में कम से कम दो ब्रेक
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ऐसे में क्या करें
पोमोडोरो तकनीक इसमें आपकी मदद कर सकती है। यह एक समय प्रबंधन पद्धति है, जो पांच मिनट के ब्रेक के बाद 25 मिनट के केंद्रित कार्य पर आधारित है। वहीं, एजाइल वर्किंग यानी फ्लैक्सिबल वर्किंग आप कर सकती हैं। यह एक साथ पूरा वक्त देने की जगह अपनी सुविधा के अनुसार काम करने पर आधारित है।
60 मिनट में कम से कम दो ब्रेक
केजीएमयू, लखनऊ के मनोचिकित्सा विभाग की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. पूजा माहौर बताती हैं, माइक्रो ब्रेक आपकी रचनात्मकता को बढ़ाता है, आपको प्रेरित करता है और आपके थकने की प्रक्रिया को कम करता है। कुछ मिनट का ब्रेक लेकर उसमें स्ट्रेच करें। थोड़ी देर टहलना या अपने काम से अलग कुछ भी करना आपको रिचार्ज करता है। यह आपकी कार्य करने की क्षमता को बढ़ता है। पोमोडोरो तकनीक और टाइम ब्लॉकिंग आपके ब्रेक को शेड्यूल करने में आपकी मदद कर सकते हैं, जिसमें ब्रेक लेने का एक टाइम शेड्यूल किया जाता है। एक अच्छा ब्रेक लेने के लिए आप अपने जरूरी कार्यों को पहले कर लें। आपके लिए 60 मिनट में कम से कम दो माइक्रो ब्रेक लेना फायदेमंद साबित हो सकता है।