सीमित संसाधनों में जब हमारी महत्वाकांक्षा पूरी नहीं होती तो हम नकारात्मक विचारों से घिर जाते हैं। ऐसी स्थिति में हमें अपने चारों तरफ सब कुछ सिर्फ नेगेटिव ही नेगेटिव नजर आने लगता और हम धीरे-धीरे एक ऐसी स्थिति में पहुंच जाते हैं, जहां हमारा अवसाद बढ़ता चला जाता है। हमारा आत्मविश्वास डगमगाने लगता है। ऐसे हालातों में उपजे नकारात्मक विचारों से कैसे दूर रहें, बता रही हैं मनोचिकित्सक डॉ. नेहा आनंद।
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हर पल उठाइए जिंदगी का लुत्फ, जानें- कैसे रहें नकारात्मक विचारों से दूर
Fri, 20 Sep 2019 04:03 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क/अमरउजाला.,लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमरउजाला.,लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Fri, 20 Sep 2019 04:03 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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डॉ नेहा आनंद
- फोटो : अमर उजाला
सबसे पहले तो अपनी तुलना दूसरों से करना बंद करें, खुद को कम या अधिक मत आंकें। जैसे हैं वैसे ही रहने की कोशिश कीजिए। दूसरों में खामियां निकालने की आदत से बचें। हर व्यक्ति में कोई न कोई कमी होती है, कोई परफेक्ट नहीं होता। ऐसा सोच लेंगे तो न तो खुद को कमतर आंकेंगे न ही दूसरों के प्रति आपका नजरिया आलोचनात्मक होगा।
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क्या आपको भी लगता है कि लोग आपको नजरअंदाज कर रहे हैं, यदि हां तो चंद मिनटों के लिए आंख बंद करके बैठ जाइए। इसके बाद इस सोच को अपने से दूर कीजिए। यह आपका वहम है, क्योंकि हर व्यक्ति का अपना एक महत्व होता है। छोटी-छोटी बातों से दुखी होना या बहुत खुश हो जाना भी ठीक नहीं। जिंदगी के हर पल का लुत्फ उठाइए। कोई भी काम करने से पहले उसके सकारात्मक व नकारात्मक पहलू पर विचार करें।
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हंसने की आदत डालें, बच्चों के बीच वक्त बिताएं
मुस्कुराना और हंसना भी एक थेरेपी है। रोजाना पांच से दस मिनट हंसिए जरूर। इससे आपके आसपास का माहौल भी खुशनुमा बना रहेगा। कोई मौका न मिले तो यूं ही हंसे। बच्चों के बीच रहने की कोशिश करें। जब तनाव ज्यादा हो जाए तो बच्चों से बातें कीजिए। घर में बच्चे नहीं हैं तो कॉलोनी के बच्चों के साथ समय व्यतीत करें। सबसे जरूरी कि अपने अंदर एक बच्चा जिंदा रखिए। अपने बचपन को याद कीजिए।
मुस्कुराना और हंसना भी एक थेरेपी है। रोजाना पांच से दस मिनट हंसिए जरूर। इससे आपके आसपास का माहौल भी खुशनुमा बना रहेगा। कोई मौका न मिले तो यूं ही हंसे। बच्चों के बीच रहने की कोशिश करें। जब तनाव ज्यादा हो जाए तो बच्चों से बातें कीजिए। घर में बच्चे नहीं हैं तो कॉलोनी के बच्चों के साथ समय व्यतीत करें। सबसे जरूरी कि अपने अंदर एक बच्चा जिंदा रखिए। अपने बचपन को याद कीजिए।
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सुबह की शुरुआत प्रसन्नचित्त होकर करें
दिन की शुरुआत खुश मन से करें। सुबह जल्दी उठें और कुछ ही देर सही टहलें जरूर। व्यायाम व योगा को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। भागदौड़ तो है, लेकिन कुछ पल के लिए ईश्वर में जरूर ध्यान लगाएं। सिर्फ पांच मिनट के लिए ही सही ईश्वर के सामने आंख बंद करके जरूर बैठें।
दिन की शुरुआत खुश मन से करें। सुबह जल्दी उठें और कुछ ही देर सही टहलें जरूर। व्यायाम व योगा को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। भागदौड़ तो है, लेकिन कुछ पल के लिए ईश्वर में जरूर ध्यान लगाएं। सिर्फ पांच मिनट के लिए ही सही ईश्वर के सामने आंख बंद करके जरूर बैठें।