सर्दी में सामान्यत: वायरल संक्रमण की बढ़ती संभावनाओं के चलते कई विशेषज्ञों का कहना था कि कोरोना संक्रमण भी सर्दियों में ज्यादा बढ़ सकता है। यूरोप के कुछ देशों में ऐसा देखा भी जा रहा है, लेकिन एक शोध अध्ययन में दावा किया गया है कि कोरोना संक्रमण के फैलने में मौसम की प्रभावी भूमिका नहीं होती। भारतीय-अमेरिकी अनुसंधानकर्ता के नेतृत्व में किए गए एक अध्ययन में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस के प्रसार में तापमान या आर्द्रता की कोई प्रभावी भूमिका नहीं है। 'इंटरनेशनल जर्नल ऑफ इनवायरमेंटल रिसर्च एंड पब्लिक हेल्थ' में यह शोध अध्ययन प्रकाशित हुआ है।
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शोध अध्ययन में यह कहा गया है कि कोरोना वायरस के संक्रमण का एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में प्रसार पूरी तरह से मानवीय व्यवहार पर निर्भर करता है, न कि गर्मी या सर्दी के मौसम पर। शोधकर्ता ने रेखांकित किया कि मौसम केवल उस माहौल को प्रभावित करता है, जिसमें कोरोना वायरस किसी नए व्यक्ति को संक्रमित करने से पहले जिंदा रहता है। इस अध्ययन में कहा गया कि मौसम हालांकि, मानवीय व्यवहार को भी प्रभावित करता है जिससे वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को संक्रमित करता है।
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अमेरिका के ऑस्टिन स्थित टेक्सास यूनिवर्सिटी में प्रोफसर देव नियोगी ने अध्ययन का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा, "कोरोना के प्रसार में मौसम का प्रभाव कम है। वहीं, इसमें अन्य पहलुओं जैसे लोगों की आवाजाही आदि संक्रमण के प्रसार में अधिक प्रभावी हैं। संक्रमण के प्रसार के सदंर्भ में विभिन्न कारकों को देखें तो मौसम आखिरी कारक है।
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अध्ययन में मौसम को हवा के तापमान के बराबर परिभाषित किया गया है जो तापमान और आर्द्रता का संयुक्त मूल्य है। वैज्ञानिकों ने इसी आधार पर मार्च से जुलाई 2020 के बीच अमेरिका के विभिन्न इलाकों के अलावा अन्य देशों, क्षेत्रों और दुनिया के स्तर पर कोरोना वायरस के प्रसार का विश्लेषण किया।
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काउंटी और राज्य के स्तर पर शोधकर्ताओं ने मोबाइल फोन डाटा के आधार पर आवाजाही का अनुमान लगाते हुए कोरोना वायरस के प्रसार और मानव व्यवहार के संबंध की भी जांच की। इन मानकों पर विश्लेषण और संभावित त्रुटियों का आकलन करने के बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि कोविड-19 के प्रसार में मौसम का प्रभाव लगभग नहीं के बराबर है।