भारत सहित दुनियाभर में इस समय कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट का संक्रमण जारी है। अध्ययनों में कोरोना के इस वैरिएंट को काफी संक्रामक माना जा रहा है, यह देश में तीसरी लहर का कारण भी बन रहा है। भारत में पिछले 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के ढाई लाख से अधिक मामले सामने आए, वहीं ओमिक्रॉन से संक्रमितों का आंकड़ा भी बढ़कर 8 हजार को पार कर गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट, डेल्टा की तुलना में अधिक संक्रामक जरूर है, हालांकि इसके कारण लोगों को गंभीर समस्याएं नहीं हो रही हैं। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए हाल ही में यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने संक्रमितों के लिए होम आइसोलेशन के समय को घटाकर 14 दिनों से 10 दिन का कर दिया था। हालांकि हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बदलाव लोगों के लिए बड़ी मुश्किलें पैदा कर सकता है।
अध्ययन: आइसोलेशन अवधि पर वैज्ञानिकों ने उठाए सवाल, कहा- ऐसा हुआ तो दूसरों के लिए खतरा बन सकते हैं संक्रमित
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10 दिनों का होम आइसोलेशन नाकाफी
वैज्ञानिकों ने अध्ययन में पाया कि संक्रमित व्यक्ति से दूसरों को होने वाले कोरोना संक्रमण के खतरे को रोकने और बीमारी के ठीक होने के लिए सिर्फ 10 दिनों का होम आइसोलेशन पर्याप्त नहीं है।एक्सेटर विश्वविद्यालय के नेतृत्व में किए गए इस शोध में होम आइसोलेशन पूरा कर चुके लोगों पर अध्ययन किया गया। इसके लिए 176 लोगों के सैंपल लिए गए जिन्हें पहले आरटीपीसीआर टेस्ट में पॉजिटिव पाया गया था। शोधकर्ताओं ने पाया कि 10 दिनों का आइसोलेशन पूरा करने के बाद भी 13 प्रतिशत लोगों में ऐसे संकेत देखे गए जिससे वह अन्य को संक्रमित कर सकते हैं।
क्या हैं आइसोलेशन के नए नियम
गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिका के स्वास्थ्य विभाग ने अपने लोगों के लिए आइसोलेशन और क्वारंटाइन का समय 14 दिन से घटाकर 10 कर दिया था, जिसे बाद में इसे और घटाकर 5 दिन किया गया। सीडीसी ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपडेट किया- कोविड-19 वाले लोगों को संक्रमण की पुष्टि के बाद 5 दिनों के लिए खुद को आइसोलेट कर लेना चाहिए। वहीं यदि रोगी एसिम्टोमैटिक है और उन्हें बुखार नहीं है तो इस अवधि के बाद मास्क पहनकर अगले पांच दिनों तक लोगों के आसपास रह सकते हैं।
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?
यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर मेडिकल स्कूल में प्रोफेसर लोर्ना हैरिस कहते हैं, हालांकि यह एक अपेक्षाकृत छोटा अध्ययन है लेकिन हमारे परिणाम बताते हैं कि संभावित रूप से शरीर में वायरस के प्रभाव 10 दिनों के बाद तक भी बना रह सकता है, ऐसे में इतने दिनों के बाद आइसोलेशन खत्म कर देने से आगे वायरस के संचरण का जोखिम हो सकता है। दूसरी बात पारंपरिक आरटी-पीसीआर परीक्षण वायरल अंशों की उपस्थिति के बारे में बताते हैं। वे यह पता नहीं लगा सकते हैं कि क्या यह अभी भी सक्रिय है और व्यक्ति संक्रामक है या नहीं। इस बारे में भी ध्यान रखने की आवश्यकता है।
10 दिनों के बाद भी शरीर में वायरस रह सकते हैं सक्रिय
यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर मेडिकल स्कूल में प्रोफेसर और अध्ययन की प्रमुख लेखक मर्लिन डेविस कहते हैं, 10 दिनों के आइसोलेशन के बाद भी लोगों में वायरस की सक्रियता के बारे में पता चलता है, ऐसे में होम आइसोलेशन के नए नियमों पर फिर से विचार किए जाने की आवश्यकता है। भारत के संदर्भ में बात करें तो यहां पर अभी भी संक्रमितों के लिए 14 दिनों का होम आइसोलेशन अनिवार्य है, इसके बाद लोगों को लगातार विशेष बचाव के नियमों का पालन करते रहने की सलाह दी जाती है, जिससे संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद मिल सके।
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स्रोत और संदर्भ
Persistence of clinically relevant levels of SARS-CoV2 envelope gene subgenomic RNAs in non-immunocompromised individuals
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