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बड़ी कामयाबी: अब कम होगा हार्ट अटैक और स्ट्रोक से मौत का खतरा, वैज्ञानिकों ने निकाला कारगर उपाय

Sat, 10 Jul 2021 01:58 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Sat, 10 Jul 2021 01:58 PM IST
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Study says, testosterone therapy could reduce many heart attack causes death
हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा - फोटो : Pixabay

खराब जीवनशैली और पौष्टिक आहार में कमी के कारण हाल के वर्षों में हृदय रोगों का खतरा तेजी से बढ़ा है। भारत दुनियाभर में कार्डियोवैस्कुलर बीमारी (सीवीडी) से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से एक है। आंकड़ों के मुताबिक भारत में सीवीडी के कारण होने वाली कुल मौत जो साल 1990 में 2.26 मिलियन (22.6 लाख) थी, वह साल 2020 में बढ़कर 4.77 मिलियन (47.7 लाख) से अधिक हो गई है। हृदय रोग के तेजी से बढ़ते मामले और इसके कारण होने वाली मौतें स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। हालांकि अब इस समस्या को कम करने के लिए वैज्ञानिकों ने बढ़िया तरीका ढ़ूंढ लिया है।


हालिया शोध के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों ने बताया है कि टेस्टोस्टेरोन थेरपी के माध्यम से हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। जिन पुरुषों में इस  हार्मोन की अस्वाभाविक रूप से कमी हो, उन्हें इसके सप्लीमेंट देकर हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। दस साल तक किए गए इस अध्ययन को यूरोपियन एसोसिएशन ऑफ यूरोलॉजी कांग्रेस में प्रस्तुत किया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि टेस्टोस्टेरोन थेरपी के माध्यम से लोगों में हृदय रोगों के खतरे को कम करने में बड़ी सफलता मिल सकती है।

Study says, testosterone therapy could reduce many heart attack causes death
हार्ट अटैक के खतर को कम करने का उपाय - फोटो : Pixabay

टेस्टोस्टेरोन की कमी वाले लोगों पर किया गया अध्ययन
इस अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने जर्मनी और कतर के 800 से अधिक ऐसे पुरुषों को शामिल किया जिनमें टेस्टोस्टेरोन की कमी थी। टेस्टोस्टेरोन, पुरुषों में प्राथमिक सेक्स हार्मोन और एनाबॉलिक स्टेरॉयड होता है। टेस्टोस्टेरोन का मुख्य कार्य पुरुष प्रजनन ऊतकों जैसे वृषण और प्रोस्टेट का विकास करना होता है। इस अध्ययन में केवल उन्हीं पुरुषों को शामिल किया गया जिनमें टेस्टोस्टेरोन  की कमी के लक्षण जैसे भूख में कमी, अवसाद, स्तंभन दोष, कामेच्छा में कमी जैसी शिकायतें थीं।

Study says, testosterone therapy could reduce many heart attack causes death
टेस्टोस्टेरोन थेरपी से कम कर सकते हैं हृदय रोग का खतरा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media

अध्ययन में क्या पता चला?
अध्ययन के दौरान आधे से अधिक पुरुषों को लंबे समय तक टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी दी गई। इस थेरपी के साथ सभी पुरुषों को शराब-धूम्रपान से दूर रहने के साथ नियमित रूप से पौष्टिक आहार लेने और व्यायाम करने की सलाह दी गई। टेस्टोस्टेरोन थेरेपी ले रहे 412 पुरुषों में से 16 की मृत्यु हो गई, हालांकि इनमें से किसी की भी मृत्यु का कारण हार्ट अटैक या स्ट्रोक नहीं था, वहींटेस्टोस्टेरोन थेरपी न लेने वाले समूह वाले  393 पुरुषों में से 74 की मृत्यु हो गई। इसमें से 70 की मृत्यु का कारण हार्ट अटैक था।

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Study says, testosterone therapy could reduce many heart attack causes death
टेस्टोस्टेरोन थेरपी की सभी लोगों को आवश्यकता नहींं - फोटो : iStock

क्या कहते हैं शोधकर्ता?
कतर स्थित हमाद मेडिकल कॉरपोरेशन के प्रोफेसर उमर अबूमारज़ौक कहते हैं, टेस्टोस्टेरोन थेरेपी लेने वाले समूह के लोगों में हृदय रोग के मामले नहीं देखे गए। इससे यह स्पष्ट होता है कि इस उपचार विधि से लोगों में हृदय रोगों के कारण होने वाली मौत के खतर को कम किया जा सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि सभी हृदय रोगियों को टेस्टोस्टेरोन थेरपी दी जाए। इसका उपयोग केवल उन रोगियों पर ही किया जाना चाहिए जो कुछ मानदंडों को पूरा करते हों।

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Study says, testosterone therapy could reduce many heart attack causes death
हार्ट अटैक के खतरे को कम कर सकते हैं - फोटो : pixabay

हृदय के सभी रोगियों के लिए नहीं है यह इलाज
अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि यदि टेस्टोस्टेरोन के सामान्य स्तर वाले पुरुषों को यह थेरपी दी जाए तो इसके परिणाम हानिकारक हो सकते हैं। टेस्टोस्टेरोन की कमी वाले लोगों में दिल के दौरे और स्ट्रोक का जोखिम अधिक हो सकता है, ऐसे में थेरपी के माध्यम से टेस्टोस्टेरोन के स्तर को सामान्य करके उनकी सेहत में सुधार किया जा सकता है। हालांकि इसके साथ अन्य उपायों को प्रयोग में लाना भी आवश्यक है इसमें रोजाना व्यायाम और स्वस्थ भोजन करना, धूम्रपान और शराब जैसी आदतों को छोड़ना शामिल है।

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नोट:
यह लेख यूरोपियन एसोसिएशन ऑफ यूरोलॉजी कांग्रेस में प्रस्तुत किए गए अध्ययन के आधार पर तैयार तैयार किया गया है। इस अध्ययन को अभी जर्नल में प्रकाशित नहीं किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

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