जंगलों और प्रकृति से घिरा देश का दक्षिणी राज्य केरल हाल के वर्षों में कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों के प्रकोप को लेकर चर्चा में रहा है। जुलाई-अगस्त में केरल में ब्रेन-ईटिंग अमीबा और फिर सितंबर के महीने में 'अफ्रीकी स्वाइन फीवर' की खबरें काफी चर्चा में रही थीं। अमर उजाला में रविवार (12 अक्तूबर) को प्रकाशित रिपोर्ट में हमने राज्य में लेप्टोस्पायरोसिस रोग फैलने की जानकारी दी थी, यहां कथित तौर पर इस संक्रामक रोग के कारण एक किशोर की मौत हो गई थी।
Kerla: केरल ने इस समस्या को घोषित किया 'स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण विषय', गजट नोटिफिकेशन जारी
केरल सरकार ने सर्पदंश विष को अत्यंत जन स्वास्थ्य महत्व की समस्या घोषित किया है। यह कदम संबंधित घटनाओं से होने वाली मौतों पर चिंताओं के जवाब में डेटा संग्रह और दस्तावेजाकरण को बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सर्पदंश के मामलों को लेकर जारी की गई राजपत्र अधिसूचना
शुक्रवार को जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, यह महत्वपूर्ण निर्णय केरल लोक स्वास्थ्य अधिनियम, 2023 की धारा 28 के तहत लिया गया। इसमें कहा गया है कि सर्पदंश विष एक जानलेवा स्थित है जिसके कारण बड़ी संख्या में लोगों की जान चली जाती है। अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) डॉ. राजन खोबरागड़े द्वारा हस्ताक्षरित अधिसूचना में कहा गया है, "सर्पदंश विष को पूरे राज्य में जन स्वास्थ्य महत्व की बीमारी घोषित किया जाता है।
इसमें कहा गया है कि कोई भी बीमारी, चाहे वह संक्रामक हो या गैर-संक्रामक, जन स्वास्थ्य महत्व की बीमारी घोषित की जा सकती है यदि सरकार को उसके बारे में अधिक जानकारी एकत्र करने की आवश्यकता हो या यदि उसके संबंध में किसी उपचार मानकों का पालन किया जाना हो।
यदि समय पर उचित उपचार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो विषैले सांप के काटने से व्यक्ति की मृत्यु हो सकती है या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, जिससे घातक या स्थायी विकलांगता हो सकती है।
यह महत्वपूर्ण सरकारी अधिसूचना केरल उच्च न्यायालय द्वारा आई है। मुख्य न्यायाधीश नितिन जामदार और न्यायमूर्ति शोभा अन्नम्मा इपेन की खंडपीठ ने कहा कि भारत के कई राज्यों ने सर्पदंश को अधिसूचित रोग घोषित कर दिया है, जिससे मामलों की सूचना देना अनिवार्य हो गया है, क्योंकि विश्वसनीय आंकड़ों के अभाव में नीतिगत हस्तक्षेप अस्थायी ही रहते हैं।
हालांकि, केरल में सर्पदंश को अभी तक अधिसूचित रोग घोषित नहीं किया गया था। मानव आवासों में सांपों के बढ़ते प्रवेश के मद्देनजर केरल वन विभाग ने "सर्प" ऐप भी लॉन्च किया है।
---------------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।