क्या आपको भी घुटनों में दर्द रहता है, सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी होती है?
उम्र बढ़ने के साथ इस तरह की दिक्कतें होना आम हैं, पर अगर 30 की उम्र से पहले ही आप इन समस्याओं का शिकार हो गए हैं तो तुरंत डॉक्टर से सलाह ले लें। ये लक्षण आर्थराइटिस यानी गठिया की शुरुआत भी हो सकते हैं।
आर्थराइटिस जोड़ों को प्रभावित करने वाली बीमारी है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ, वजन ज्यादा होने, जोड़ों के पुराने चोट के कारण आपको ये समस्या हो सकती है। इसके अलावा यदि आपके परिवार में पहले से किसी को ये बीमारी रही हो तो आपमें भी आर्थराइटिस का जोखिम बढ़ सकता है। वैसे तो आर्थराइटिस को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन शारीरिक गतिविधि, वजन को कंट्रोल रखने और जोड़ों को चोट से बचाकर ऑस्टियोआर्थराइटिस के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
आइए जानते हैं कि आप इस समस्या से कैसे बचाव कर सकते हैं?
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गठिया की दिक्कत
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गठिया से बचाव के लिए शरीर को रखें सक्रिय
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, शारीरिक गतिविधि आर्थराइटिस के जोखिम को कम करने और पहले से मौजूद आर्थराइटिस के लक्षणों को कंट्रोल करने में मदद कर सकती है।
- तेज गति से चलना, साइकिलिंग, तैराकी और हल्के व्यायाम जोड़ों पर अपेक्षाकृत कम दबाव डालते हैं।
- वयस्कों को सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम तीव्रता वाली गतिविधि और कम से कम दो दिन मांसपेशियों को मजबूत करने वाली गतिविधि करने की सलाह दी जाती है।
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वजन को कंट्रोल करना जरूरी
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वजन को कंट्रोल रखना जरूरी है
शरीर का वजन ज्यादा होना घुटने और कूल्हे जैसे जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डालता है। इससे ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा बढ़ सकता है। वजन अधिक होने से पहले से मौजूद समस्या में दर्द भी ज्यादा हो सकता है। इसलिए गठिया से बचाव के लिए वेट लॉस सबसे जरूरी है।
- संतुलित भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि के जरिए वजन को बढ़ने से रोका जा सकता है।
- जिन लोगों का वजन अधिक है, उनके लिए 5-10% वजन कम करना भी आर्थराइटिस से जुड़े दर्द और चलने-फिरने की परेशानी को कम करने में मदद कर सकता है।
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जोड़ों में दर्द की समस्या
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जोड़ की चोट को मामूली न समझें
घुटने या किसी दूसरे जोड़ में लगी चोट भविष्य में ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा बढ़ा सकती है। आमतौर पर खेल के दौरन, गिरने या काम के दौरान बार-बार एक ही जोड़ पर दबाव पड़ने से जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए व्यायाम करते समय सही तकनीक अपनाना, शरीर को धीरे-धीरे गतिविधि के लिए तैयार करना और चोट लगने पर पर्याप्त आराम व जरूरत पड़ने पर डॉक्टरी मदद जरूरी है। बार-बार होने वाले जोड़ के दर्द को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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