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Covid-19: कोरोना के नए वैरिएंट्स से अब डरने की जरूरत नहीं, वैज्ञानिकों ने ढूंढ लिया इसका प्रभावी तरीका

Thu, 30 May 2024 12:32 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Thu, 30 May 2024 12:32 PM IST
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researchers developed promising human monoclonal antibody that works against all strains of SARS-CoV-2.
कोरोना संक्रमण की समस्या - फोटो : istock

पिछले चार साल से जारी कोरोना महामारी अब भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। वायरस में लगातार हो रहे म्यूटेशन के कारण नए-नए वैरिएंट्स सामने आते रहे हैं। इनमें से कई वैरिएंट्स शरीर में वैक्सीन और प्राकृतिक संक्रमण से बनी प्रतिरक्षा के लिए भी चुनौती साबित हो रहे हैं। मसलन, जिन लोगों का टीकाकरण हो चुका है उन्हें भी संक्रमण के खतरे से सुरक्षित नहीं माना जा सकता है। यही कारण है कि कुछ अध्ययनकर्ता इन्फ्लूएंजा की ही तरह से हर साल कोविड के टीके दिए जाने की भी मांग करते रहे हैं।



अब जल्द ही कोरोना के नए वैरिएंट्स के कारण होने वाले जोखिम कम हो सकते हैं। असल में वैज्ञानिकों की एक टीम को यूनिवर्सल कोविड एंटीबॉडी बनाने में सफलता मिली है जो भविष्य में भी आने वाले कोरोना के नए वैरिएंट्स के खिलाफ प्रभावी साबित हो सकती है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर इस दिशा में सफलता मिलती है तो ये एंटीबॉडीज सार्स-सीओवी-2 के सभी स्ट्रेन से हमें सुरक्षा प्रदान करने वाली हो सकती हैं।

researchers developed promising human monoclonal antibody that works against all strains of SARS-CoV-2.
कोरोना का बढ़ता खतरा - फोटो : istock

वैज्ञानिकों ने विकसित की मोनोक्लोनल एंटीबॉडी

सार्स-सीओवी-2 वायरस कोविड-19 बीमारी का कारण बनता है। ये लगातार विकसित हो रहा है। वर्तमान के वैरिएंट्स आसानी से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को चकमा देकर संक्रमण बढ़ाने वाले पाए जा रहे हैं। इन्हीं जोखिमों को कम करने के लिए टेक्सास बायोमेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट ने अलबामा विश्वविद्यालय (UAB) और कोलंबिया विश्वविद्यालय के साथ मिलकर एक नया ह्यूमन मोनोक्लोनल एंटीबॉडी विकसित किया है जिसे कोरोना के लगभग सभी वैरिएंट्स के खिलाफ प्रभावी माना जा रहा है।

विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई है कि ये एंटीबॉडी भविष्य में कोरोना के म्यूटेशन से उत्पन्न वैरिएंट्स के खिलाफ भी प्रभावी तरीके से काम कर सकती है।

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कोरोना के जोखिमों को कैसे कम करें? - फोटो : istock

मोनोक्लोनल एंटीबॉडी क्या होती हैं? 

एंटीबॉडी मानव प्रतिरक्षा प्रणाली का हिस्सा हैं जो वायरस और बैक्टीरिया जैसे बाहरी अवयवों की पहचान कर उनसे बाइंड होती हैं उन्हें नष्ट करने में मदद करती हैं। इसी तरह से ह्यूमन मोनोक्लोनल एंटीबॉडी प्रयोगशाला में बनाए गए प्रोटीन होते हैं जो शरीर को स्वयं के एंटीबॉडी बनाने के लिए उत्तेजित करते हैं, जिससे बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है।

मौजूदा एंटीबॉडी ने कोविड-19 के कई रोगियों की मदद की है, हालांकि वैज्ञानिक अब दो मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज को मिलाकर एक साथ उसके प्रभावों को जानने की दिशा में का कर रहे हैं जो सभी वैरिएंट्स के खिलाफ असरदार हो सकें।

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कोरोना के जोखिम - फोटो : istock

क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?

टेक्सास बायोमेड के प्रोफेसर और शोध के प्रमुख लेखकों में से एक डॉ लुइस मार्टिनेज-सोब्रिडो कहते हैं, यह एंटीबॉडी मूल सार्स-सीओवी-2 स्ट्रेन, ओमिक्रॉन और कोरोना के अन्य वैरिएंट्स के खिलाफ भी प्रभावी तरीके से काम कर सकती है। अगर इसे अन्य एंटीबॉडीज के साथ जोड़ा जाए तो हमें भविष्य में आने वाले कोरोना के वैरिएंट्स के खिलाफ भी सुरक्षा मिल सकती है। 

1301B7 नाम से डिजाइन की गई ये एंटीबॉडी एक रिसेप्टर बाइंडिंग डोमेन एंटीबॉडी है, जिसका अर्थ है कि यह वायरस के स्पाइक प्रोटीन को लक्षित करती है जो संक्रमण के लिए मुख्यरूप से जिम्मेदार माने जाते हैं।

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मोनोक्लोनल एंटीबॉडी - फोटो : istock

दो एंटीबॉडी को मिलाने पर अध्ययन

इससे पहले साल 2022 में, शोधकर्ताओं ने एक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी विकसित की थी। इसके अगले अध्ययन के क्रम में ये जानने की कोशिश की गई कि दो एंटीबॉडी को एक साथ जोड़ते हैं तो क्या होता है और ये किस प्रकार से वायरस को प्रभावित करती है? 

डॉ. मार्टिनेज बताते हैं, अब एकल एंटीबॉडी थेरेपी काम नहीं करने वाली है, इसलिए हमें इबोला और एचआईवी जैसी अन्य बीमारियों के लिए विकसित की जा रही थेरेपी के समान कुछ नया करने की कोशिश करनी पड़ सकती है। इस नए अध्ययन के रिपोर्ट काफी आशाजनक हैं, हमें उम्मीद है कि जल्द ही हम कोरोना  के नए वैरिएंट्स के खिलाफ प्रभावी तरीके को ढूंढ लेंगे।



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स्रोत और संदर्भ
universal COVID-19 antibodies

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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