कैंसर किसी भी तरह का हो, इसे बेहद गंभीर और जानलेवा माना जाता है। हर साल लाखों लोगों की मौत कैंसर के कारण हो जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो अगर समय रहते कैंसर का निदान हो जाए तो इलाज और रोगी की जान बचाने की संभावना बढ़ जाती है। पर चिंताजनक बात यह है कि ज्यादातर कैंसर की पहचान उसके उन्नत स्टेज में ही हो पाती है। इसका एक प्रमुख कारण है कि समय रहते हम कैंसर के लक्षणों की पहचान नहीं कर पाते हैं। पैंक्रियास या अग्नाशय का कैंसर, ऐसा ही एक बेहद गंभीर और तेजी से बढ़ता कैंसर का रूप है। साल 2017 के आंकड़े बताते हैं कि दुनियाभर में इस एक साल में 4.47 लाख से अधिक लोगों में अग्नाशय के कैंसर का पता चला।
Pancreatic Cancer: आपकी यह एक आदत दोगुना तक बढ़ा देती है कैंसर का खतरा, ऐसे लक्षण दिखते ही हो जाएं सावधान
धूम्रपान करने वालों में खतरा अधिक
कई अध्ययनों में इस बात के संकेत मिलते हैं कि धूम्रपान करने वाले लोगों में अन्य लोगों की तुलना में पैंक्रियास कैंसर के विकसित होने का खतरा दोगुना से अधिक होता है। हर पांच में से एक पैंक्रियास कैंसर रोगी को चेन स्मोकर पाया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक अगर सिर्फ धूम्रपान की ही आदत को छोड़ दिया जाए तो पैंक्रियास कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम करने में मदद मिल सकती है।
इन लक्षणों के दिखते ही हो जाएं अलर्ट
अध्ययनों में पैंक्रियास कैंसर के कई लक्षणों का जिक्र मिलता है जिसका अगर समय रहते पहचान कर लिया जाए तो इस गंभीर कैंसर को रोका जा सकता है। इन लक्षणों में दो या उससे अधिक लक्षणों का लगातार बने रहना पैंक्रियास कैंसर की ओर संकेत हो सकता है, जिसको लेकर तुरंत डॉक्टर से संपर्क किया जाना चाहिए।
- पीठ में शुरू होने वाला दर्द पेट तक बढ़ना।
- अस्पष्टीकृत रूप से वजन घटाना और भूख न लगना।
- बहुत अधिक थकावट बना रहना।
- बार-बार पीलिया की समस्या होना।
- गहरे रंग का पेशाब।
- मतली-उल्टी।
- मधुमेह का नियंत्रण में न रहना।
मोटापा-डायबिटीज बढ़ा सकते हैं खतरा
अध्ययनों से संकेत मिलते हैं कि अधिक वजन वाले किशोर और वयस्कों में अग्नाशय के कैंसर का खतरा अधिक होता है। इसके अलावा मधुमेह को भी इसके प्रमुख जोखिम कारकों में से एक माना जाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों में मधुमेह के निदान के एक साल बाद अग्नाशय के कैंसर के विकासित होने का जोखिम बढ़ जाता है। कैंसर के इस घातक रूप से बचाव के लिए मोटापा-डायबिटीज दोनों को कंट्रोल में रखने के उपाय किए जाने चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
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